देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। 22 मार्च को सोमवार का दिन था। बरसाना में लड्डू होली खेली जा रही थी। मथुरा के होलीगेट पर चहलपहल थी। अधिकारी होली के आयोजना में व्यस्त थे। पिछले साल यानी 2020 में 22 मार्च को रविवार का दिन था लेकिन हालात बहुत अलग थे। अनिश्चितता का माहौल, अनजाना सा डर और अनहोनी की आशंका।
अपनांे के लिए हर चेहरे पर चिंता तो बाहर फंसे अपनों के घर लौटने की उम्मीद। कुछ ऐसा ही मौहाल था कान्हा की नगरी मंे ठीक एक साल पहले। यानी 22 मार्च 2020 का वह दिन भुलाये नहीं भूलता है। ठीक एक बरस पहले कुछ ऐसी ही स्थिति पैदा की थी कोरोना के खौफ ने। हर तफर एक अजीब से बेचैनी थी। अनजाना खौफ हर चेहरे पर था। देर रात उधर ट्रेनों से रेलवे स्टेशन पहुंचे सैकड़ों यात्री स्टेशन पर ही डेरा डाले थे।
अपने गंतव्य तक जाने के लिए यात्री ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे। विपरीत परिस्थितियां सामने थीं लेकिन मथुरा के लोगों ने धैर्य नहीं खोया था। कोई टूटा, किसी के सपने बिखरे तो किसी के अपने बिछडे, ऐसी विपरीत हालातों में भी कोई टूटा तो दूसरे से सहारा दिया। मुशीबत मंे फंसे लोगों की मदद को हाथ बढे। जनसेवा और सामाजिक दायित्व को निभाने का एक सबक कान्हा की नगरी ने दिया। जरूरतमंदों की मदद को होड सी लग गई। मानों हर कोई इस राष्ट्रीय आपदा के समय अपना फर्ज निभाना चाहता था।
शुरुआत हुई थी रविवार 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से। प्रधानमंत्री का आह्वान था। एकजुटता दिखाने की अपील थी। कहा गया कि कोरोना संक्रमण को तोड़ना है तो घरों में कैद हो जाइए। लोगों ने आह्वान को चुनौती के रूप में स्वीकार किया।
कोरोना को हराने के लिए धर्म नगरी ने अद्भुत जीवटता दिखाई। जनता कर्फ्यू का धर्मनगरी में अभूतपूर्व असर दिखा। होली गेट से लेकर सब्जी मंडी तक सब बंद रहे। छोटे से लेकर बड़े बाजार तक बंद रहे। यहां तक कि गली मोहल्लों में भी लोगों ने घरों से बाहर निकलने से परहेज किया।
बडे मंदिरों को पहले ही सार्वजनिकरूप से बंद कर दिया गया था, इस लिए वह लोग भी घरों में रहे जो नियमितरूप से पूजा अर्चना के लिए सुबह निकरते थे। भगत सिंह पार्क से भी लोग नदारद थे। रोजमर्रा का सामान भी लोगों ने शाम को ही खरीद लिया था।
सूरज की पहली किरण के साथ ही सडकों पर सन्नाटा पसर गया था। धर्म नगरी कोरोना को हराने के लिए लोगों ने अद्भुत जीवट ता का परिचय दिया था। होली गेट, भरतपुर गेट, डीगेट, सदर बाजार, धौलीप्याउ, कृष्णा नगर, सौंख रोड किसी भी सडक पर निकल जाओ बस सन्नाटा पसरा हुआ था।
नेपाल लौटने को बस स्टैण्ड
देश के विभिन्न शहरों से अपने देश नेपाल लौट रहे लोगों ने जनता कर्फ्यू की सुबह कान्हा की नगरी में प्रशासनिक मशीनरी के हाथपैर पुला दिये थे। देश के विभिन्न शहरों में रह रहे नेपाली नागरिक अपने देश नेपाल लौट रहे थे। गौरीफंटा, सोलोनी और गोरखपुर जाने के लिए ये लोग मथुरा पहुंचे गये थे। टेªन और बसों के बंद हो जाने से ये लोग यहां फंस गये थे।
धर्म नगरी में पहली बार दिखा था ऐसा नजारा
मथुरा में पहली बार इस तरह का सन्नाटा पसरा था। सड़क बिल्कुल वीरान हो गई थीं, बाजारों में एक भी दुकान खुली नहीं दिख थी। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन वीरान पड़े रहे थे। हालत यह है कि जो चाय की दुकानें 24 घंटे खुली रहती थी। सड़कों पर रिक्शेवाले भी नजर नहीं आय थे।
मंदिरों पर शंखनाद, बजे थे घंटा घडियाल
जनता कर्फ्यू के दौरान रविवार शाम पांच बजते ही पूरा ब्रज मंडल शंख, घंटा-घड़ियाल और तालियों की ध्वनि से गूंज उठा था। लोगों ने कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे सेहत के सिपाहियों को सलाम किया। उनके सम्मान के लिए लगातार पांच मिनट तक शंख, घंटा-घड़ियाल, थाली और तालियां बजी थीं।
सब्जियों के दामों में लग गइ थी आग
सब्जिायों के दामों में मानो आग ही लग गई थी। 22 मार्च 2020 को पूरे दिन घरों में कैद रहने के बाद जब लोग घरों से साग सब्जी लेने निकले तो सब्जियांे के भाव आसमान छू रहे थे। आलू 25 से 30 रूपये प्रति किलो बिक रहा था। प्याज 40 रूपये किल, हरी मिर्च 80 से 90 रूपये प्रति किला, टमाटर 40 रूपये प्रति किला तथा अदरक 100 रूपये प्रति किला मिल रहा था।













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