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मथुरा को भुगतने पड़ सकते हैं रेगिस्तान जैसे गंभीर परिणाम!

मथुरा। भूगर्भीय जल लगातार गिर रहा है। 11 ब्लाक में से बल्देव, नौहझील व राया ब्लाक डार्क जोन में हैं। साथ ही फरह व मांट ब्लाक क्रटिकल जोन के मुहाने पर खड़े हैं। जो कि पानी के गंभीर संकट को दर्शाता है।

खारे पानी की गंभीर समस्या से मथुरा जनपद पहले से ही जूझ रहा है। मथुरा में हजारों आरओ प्लांट एवं सबमरसेबिल से पानी का दोहन हो रहा है जिसके कारण कुछ स्थानों पर भूजल तीसरे स्ट्रेटा (90 से 150 मीटर) तक पहुंच गया है। कुछ ही वर्षों के बाद मथुरा को इसके रेगिस्तान जैसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


मुख्य विकास अधिकारी नितिन गौड़ के मुताबिक केन्द्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड द्वारा तैयार किये गये प्रारूप पर संबंधित विभागों ने अपनी रिपोर्ट भेजी है। पंचायतीराज, सिंचाई, जल संसाधन, ग्राम्य विकास, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल, राजस्व विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद प्रारूप-2 को तैयार कराया गया है।


प्रारूप में जल के निकाय का स्थान विवरण, जल निकाय के क्षेत्र और आयमों का विवरण, पानी की गहराई में मानसून से पहले और गैर मानसून अवधि के दौरान जल की स्थिति, जल निकाय का स्वामित्व, आंवटित विशिष्ट पहचान संख्या, आवास पर विवरण, आस-पास के क्षेत्रों, आबादी के साथ कस्बों और आस-पास के क्षेत्र में उद्योगों की संख्या, तालाब या झील के जलग्रहण में औद्योगिक संपदा, जल निकाय में प्रवाह, बहिर्वाह, वाष्पीकरण, बाढ़, आवृत्ति, प्रवाह की भयावहता के बारे में विवरण, जल निकाय में मौजूद प्रमुख वनस्पति और पशु समुदाय, तालाब या झील का निर्धारित उपयोग, पर्यटन, संरक्षित जैव विविधता, प्रमुख नालियों जल निकाय में गिरना, जल निकाय की शारीरिक स्थिति, जल निकाय के जल की गुणवत्ता आदि विषयों पर प्रारूप पूरी जानकारी जुटाई गयी है। कभी मथुरा की जलीय व्यवस्था पूर्ण और सुव्यवस्थित हुआ करती थी। दो नदियों यमुना और पटवाह , तीन सहायक नदियों करबन, सेंगर व सिरसा । तीन झील नोहझील , मोतीझील माँट व मोतीझील वृंदावन। चार सरोवरों पानसरोवर नंदगांव , मानसरोवर वृंदावन, चंद्र सरोवर पारासौली गोवर्धन व प्रेम सरोवर बरसाना । 25 घाट, 159 कुंड, सैकड़ों ताल , पोखर और कूपों के रूप में पानी की उपलब्धता प्रचुर मात्रा मे रही है।

वाॅटर बाॅडीज के पुर्नजीवन हेतु कार्य योजना तैयार की गई है। पंचायतीराज, सिंचाई, जल संसाधन, ग्राम्य विकास, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल, राजस्व विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए दिये गये प्रारूप-2 को भरवाया गया है। नितिन गौड़, मुख्य विकास अधिकारी मथुरा

 

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