देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। मन के हारे हार, मन के जीते जीत है। इंसान जब तक नहीं हारता है, तब तक जीतने का प्रयास बंद नहीं करता है। मेहनत, लग्न, शिक्षा, स्वरोजगार हर किसी को सशक्त बना देती है। ये विचार गिल्ड फार सर्विस की चेयरपर्सन डा मोहिनी गिरी ने व्यक्त किए।
मंगलवार को अंतराष्ट्रीय विधवा महिला दिवस के उपलक्ष्य में छटीकरा वृंदावन रोड स्थित मां धाम में आयोजित एक संगोष्ठी को आनलाइन संबोधित कर रही थीं। यहां निवास कर रही सभी विधवा माताओं से रुबरु हुई। सभी के हाल चाल जाने और उन्हें जीवन से निराशा, हताशा मिटाने के तमाम टिप्स बताए।
सभी का हौंसला अफजाई किया। उन्होंने कहा कि उन्हे कभी अकेले होने का गम नहीं होने दिया जायेगा। सभी आत्मनिर्भर बनें और आगे बढें। उन्होंने कहा कि अशिक्षा शोषण की मुख्य वजह है। इसलिए शिक्षित जरुर बनें। दुनिया मे करीब 12 करोड़ विधवा महिलाएं गरीबी में जी रही है।
अशिक्षा के कारण करीब 8 करोड़ महिलाओं शोषण होता है। अकेले भारत मे लगभग 4 करोड विधवायें है। इनमें से 15 हजार विधवायें वृन्दावन की सड़कों पर रहती हैं। जो कि किसी न किसी तरह समाज के द्वारा दुत्कारी हुई है। वो आज भी अपने घर,परिवार के साथ रहना चाहती हैं।
मगर समाज मे फैली कुरीतियों के कारण वह आज वो दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। पेंशन जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रबंधक मंजीत सिंह उनके अधिकारों के संबंधों में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। माताओं उपहार दिए गए। कार्यक्रम में सरिथा, माया, अवदेश कुमारी, सरिता सहित अन्य कर्मचारियों ने सहयोग किया।













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