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कृषि उत्पाद को स्थानीय स्तर पर उद्योग से जोड़ने की पहल, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

देश में कृषि निर्यात बढ़ा कर किसानों की आय दोगुनी करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश सरकार कृषि को स्थानीय स्तर पर ही उद्योग से जोड़ने के लिए पूरी कोशिश में जुटी हुई है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन भी होंगे। इसके साथ ही कृषि उत्पाद की बिक्री में किसानों को समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

इसके लिए प्रदेश सरकार ने पहले “एक जिला, एक उत्पाद” के तहत फसलों को भी जोड़ा और अब संबंधित जिले की फसल से संबद्ध उद्योग लगाने पर लोन मुहैया करा रही है। यही नहीं, लोन पर तीस प्रतिशत तक अनुदान भी है। इससे सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही किसानों की आय में काफी बढ़ोत्तरी होगी। 

 

एक जिला, एक उत्पाद के तहत उत्पाद

दरअसल, प्रदेश में “एक जिला, एक उत्पाद” के तहत लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, अमरोहा, मऊ का आम उत्पाद है। वैसे ही दुग्ध आधारित उत्पाद चयन अलीगढ़, बरेली, बुलंदशहर, जौनपुर, कानपुर देहात का हुआ है। घी में औरैया, कासगंज, जैगरी (लाल गुड) में अयोध्या, बागपत, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, शामली, मिर्च अम्बेडकर नगर, देवरिया, वाराणसी का है। 

आंवला के लिए अमेठी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली का उत्पाद रखा गया है। तुलसी-आजमगढ़ व झांसी। केला- बहराइच, गोंडा, कुशीनगर, खीरी, श्रावस्ती। तिलहन उत्पाद- बांदा, चित्रकूट व महोबा रखा गया है। बाराबंकी, रामपुर, संभल, सुल्तानपुर का मिंट। बस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल। भदोही, गाजीपुर का प्याज उत्पाद रखा गया है। ऐसे ही बदायूं, कौशांबी, प्रयागराज का अमरूद। चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र का टमाटर। सहारनपुर व मुरादाबाद का शहद। कन्नौज, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद का आलू। गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर का बेकरी उत्पाद। आगरा व हापुड़ का पेठा। हरदोई का मूंगफली उत्पाद। हाथरस का हींग। जालौन का मटर। ललितपुर का हल्दी, मैनपुरी का लहसुन, एटा का चिकोरी, बलिया का मसूर, हमीरपुर का मत्स्य उत्पाद, इटावा का सरसों आधारित उत्पाद। मथुरा का पेड़ा विशेष श्रेणी अर्थात ओडीओपी के तहत रखा गया है।

 

 उद्योग खोलने पर सरकार देगी अनुदान

जिस जिले की जो भी फसल या उत्पाद है, अगर उससे संबंधित कोई उद्योग उस जिले में कोई खोलता है तो पांच लाख से पचास लाख तक लोन की सुविधा है। इस लोन में सरकार तीस प्रतिशत तक अनुदान देगी। इसके अलावा अन्य कई सहूलियतें भी दी जाएंगी। किसी उत्पाद में यदि ओडीओपी का .1 प्रतिशत भी मिश्रित रहता है, तो उसे उससे संबंधित मान लिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर गाजीपुर जिले का प्याज ओडीओपी के तहत आता है। कोई नमकीन या अन्य खाद्य पदार्थ, जिसमें .1 प्रतिशत प्याज की मात्रा मिली हो, तो उसे प्याज संबंधित उद्योग माना जाएगा और उसको लोन आदि की सुविधाएं मिल जाएंगी।

योजना के प्रति लोगों में उत्सुकता

इस संबंध में प्रदेश के उद्यान निदेशक डॉक्टर आरके तोमर का कहना है कि किसानों व उद्यमियों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। इस योजना के प्रति लोगों में काफी उत्सुकता भी है। उद्योग लगाने के लिए काफी संख्या में लोग आगे आ रहे हैं। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन होगा।

नारद संवाद

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