देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। आज पूरा ब्रज भगवान श्रीकृष्ण की गौचारण लीला का साक्षी बनेगा। गायों को गौशालाओं में सचाया संवारा जाएगा। श्रंगार किया जाएगा। पूजन किया जएगा। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप गौचारण करेंगे। गाय के प्रति ऐसी श्रद्धा हर ओर दिखेगी कि देखने वाले मंत्र मुग्ध हो जाएंगे। यह सब वह उपक्रम हैं जिनके दम पर और गायों के नाम पर करोडों रूपये यहां की गौशालाओं और संस्थाओं को देश विदेश से मिलते हैं। जनपद में कुल 39 पंजीकृत गोशालाएं हैं। इनमें से 10 को सरकारी मदद मिलती है। सरकारी मदद गोषाला में छोटे बडे गोवंष के 70 प्रतिषत के हिसाब से 30 रूपये प्रति गोवंष मिलती है। इसके अलावा करोडों रूपये गाय के नाम पर दान आता है। अगर यमुना की दुर्दषा के बाद किसी का सबसे ज्यादा दोहर हो रहा है तो वह गाय की दुर्दषा है। ब्रज में गाय के नाम पर दान मागने की परंपरा रही है। इसे गौसेवा कहते हैं। ब्रज में आने वाले अधिकांष श्रद्धालु गौसेवा के नाम पर कुछ न कुछ देकर जाते हैं। इसके बाद भी ब्रज में गाय भूख प्यास से तडपतडप कर मर रही है। प्रमुख मंदिरों में रिसीवर तैनात कर दिये गये हैं। बरसाना के लाडली जी मंदिर में सेवा को लेकर झगडा बढता जा रहा है। सेवायत पैसे के लिए लडमर रहे हैं। ब्रज में ऐसे मंदिरों की संख्या बहुतायत में है जिन पर महीने में करोडों रूपये का दान आता है और अरबों रूपये की संपत्ति मंदिरों से जुडी है। इस दान के पीछे श्रद्धालुओं की कान्हा और उसकी गाय से जुडी आस्था ही है जो उन्हें यहां खींच कर लाती है। इसके बावजूद इन अरबों के दान में से कान्हा की गायों के लिए फूटी कौडी नहीं दी जा रही। बेसहारा पशुओं ने फसलों को उजाड़ा तो सात माह पहले अक्टूबर में किसानों ने हंगामा किया था। तब शासन के निर्देश पर अस्थायी गोशालाएं खोली गई थीं। इधर, गायों के मरने का सिलसिला जारी है।
बंद हो गयीं अस्थाई गौशालाएं
ग्रामीणों का आरोप है कि पहले प्रशासन के आदेश पर अस्थायी गोशाला में गाय रखी थीं। इनके आहार की नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्थाएं नहीं की गई। इसलिए गोवंश दम तोड़ रहा है। ब्रज में परंपरा रही है कि जो लोग मठ मंदिरों से जुडे हैं वह श्रद्धालुओं से गाय की सेवा के नाम पर दान मांगते हैं। श्रद्धालु गाय की सेवा के लिए दान देते भी हैं लेकिन इस दान में गाय तक कुछ पहुंचता नहीं है। कई ऐसी संस्थाएं भी काम कर रही हैं जो बाकायदा विदेषों से भी गाय और गोषाला के नाम पर चंदा प्राप्त करती हैं। यमुना की दुर्दषा का जमकर दोहन हुआ है। करोडांे का चंदा चिठ्ठा हुआ, लेकिन नतीजा ठाक के तीन पात ही निकला। इसके बाद गाय की दुर्दषा का जमकर दोहन हो रहा है। गाय की हालत पर आंसू बहाकर दान इकठ्ठा करने के लिए कुकुरमुत्तों की तरह संस्थाएं खडी हो गई हैं।













Related Items
यमुना मैय्या की कराह
कौन सुने यमुना की करुण पुकार?
MATHURA : ठाकुर जानकी वल्लभ लाल का धूमधाम से मनाया अन्नकूट महोत्सव