देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreटोक्यो ओलंपिक की सफलता का खुमार अभी भारतीयों के दिल से उतरा नहीं था कि उससे पहले देश के एथलीटों ने जश्न का एक और मौका दे दिया है। नैरोबी में जारी अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैम्पीयनशिप में भारतीय 4×400 रिले टीम ने कांस्य पदक जीत लिया है। यह भारतीय एथलीटों का वैश्विक एथलेटिक्स प्रतिस्पर्धाओ में किए गए शानदार प्रदर्शनों में से एक है। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस सफलता पर हर्ष व्यक्त किया है।
किस प्रकार जीता कांस्य पदक
बुधवार को नैरोबी में, बाराथ ने टीम को अच्छी शुरुआत दी। उन्होंने 47.12 सेकंड का समय लेकर दक्षिण अफ्रीका के एंटोनी नॉर्टजे के बाद दूसरे स्थान पर रहे। प्रिया मोहन की 52.77 सेकेंड की टाइमिंग ने भारत को तीसरे स्थान पर खिसका दिया। अंतिम चरण में, सुमी ने पोलैंड की एलिसजा काजमारेक को दूसरे स्थान के लिए पूरी दौड़ में कड़ी टक्कर दी। लेकिन अंततः उन्होंने 54.29 सेकंड के समय के साथ भारतीय टीम को तीसरे स्थान पर बनाए रखा। शुरू कपिल के धमाकेदार प्रदर्शन से भारत को मदद मिली और भारत को 3: 20.60 सेमी सेकंड के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
क्या थी खिलाड़ियों की मनोदशा
समी, जिनकी यह पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, ने बुधवार को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा कि ‘फाइनल में खेलने का प्रेशर तो बिलकुल भी नहीं था, लेकिन भरोसा था कि हम पदक जरूर जीतेंगे।
पदक विजेता रिले टीम के दूसरे खिलाड़ी कपिल ने कहा कि ‘मैं पूरे समय स्वर्ण जीतने के बारे में ही सोच रहा था। इस बार हम चूक गए अगली बार, हम निश्चित रूप स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम बढ़ाएंगे।
एथलेटिक्स में भारत ने अब तक जीते हैं 5 पदक
4×400 रिले टीम में शामिल बरथ श्रीधर, प्रिया मोहन, सुमी और कपिल की चौकड़ी ने U20 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पीयनशिप में कांस्य जीता। एथलेटिक्स में 2002 में डिस्कस थ्रो में भारतीय एथलीट सीमा अंतिल द्वारा कांस्य पदक जीतने के बाद, भारत का इस आयोजन में यह मात्र पांचवां पदक है। एथलेटिक्स विश्व चैम्पीयनशिप भारत की ओर से 2014 में डिस्कस थ्रो में नवजीत कौर ढिल्लों ने कांस्य पदक, नीरज चोपड़ा ने 2016 में भाला फेक में स्वर्ण पदक और 400 मीटर दौड़ में हिमा दास ने 2018 में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
एशियाई खेलों से ही जाग गई थीं उम्मीदें
पिछले एशियाई खेलों में भारत की रिले टीम ने जिस प्रकार सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था। उसके बाद से ही ये कयास लगाए जाने लगे थे कि भारतीय 4×400 रिले टीम विश्व एथलेटिक चैम्पीयनशिप और ओलंपिक जैसी वैश्विक स्पर्धाओं में भी पदक जीतने की क्षमता रखती है। इस बार के टोक्यो ओलंपिक में पहली बार मिश्रित 4×400 रिले खेलों की शुरुआत की गई थी।













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