देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। नंदगांव और बरसाना की सुप्रसिद्ध लठामार होली की द्वापरयुगीन परंपर जीवंत हो उठी। बरसाना के वृषभानु भवन से होली का न्योता लेकर राधारानी की सखियां नंदगांव पहुंचीं। यहां गोस्वामी समाज और श्रीकृष्ण स्वरुप सखाओं ने उनका स्वागत किया और उनके फाग आमंत्रण को स्वीकार कर लिया। नंदबाबा के नंदभवन में फाग आमंत्रण महोत्सव की धूम मची।
सखियां जब बरसाना श्रीजी महल में होली निमंत्रण को स्वीकार करने की बात सुनाती हैं तो माहौल खुशनुमा हो जाता है। पांडे लीला के बाद सैकड़ों किलो लड्डू बरसाए जाते हैं। इस लड्डू होली को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और लड्डू प्रसाद पाकर स्वयं को धन्य भी मानते हैं। सुबह फाग आमंत्रण के बाद शाम को लड्डू होली का आयोजन हुआ। बरसाना से होली का न्योता आने की सूचना नंदभवन से हेला लगाकर नंदगांव वालों को दी जाती है। निमंत्रण के बाद सब होली खेलने बरसाना जाने की तैयारी करने लगते हैं।
बरसाना से होली का न्योता लेकर पहुँची वृंदावन की रंगीली सखी पांच वर्ष से न्योता देने जा रही है। उससे पहले उनकी गुरु श्यामादासी होली का न्योता देने के लिए जाया करती थीं। रंगीली सखी अपने साथ एक हांडी में गुलाल, पान बीड़ा, खीरसा, इत्र, फुलेल आदि प्रसाद लेकर पहुंचीं।
उन्होंने नंदभवन जाकर माखन चोर कन्हैया को राधा का न्योता दिया कि पूरे ग्वाल बाल मंडली संग बरसाने में होरी खेलने को बुलायौ है। वृषभानुपुर ते वृषभानुजी कौ होरी कौ बुलाबौ आयौ है, सब ग्वाल-बाल होरी खेलवे के तांईं बरसाने आमंत्रित हैं। निमंत्रण की सुन सभी ग्वाल मदमस्त हो जाते हैं और नंदभवन में जम कर रसिया होली का आयोजन किया जाता है।
जिसमे नंदगांव के ग्वाल वाल राधारानी की सखियों के साथ ब्रज के पवित्र और पावन भजनों पर नाच गान करते है। हसीं ठिठोली करते है। नंदगांव के नंदभवन में मनमोहक दृश्य को देखने के मंदिर हजारों लोगों की भीड़ देखने को मिली। जिन्होंने इस दृश्य को बड़े ही उत्साह के साथ देखा। हर कोई इस फाग आमंत्रण का हिस्सा बनने को लालायित था। इसके बाद बरसाने से आईं सभी सखियों को राजभोग कराया जाता है और ठाकुर जी का भोग प्रसाद भेंट कर सप्रेम विदा किया जाता है। हुरियारे लठामार होली की तैयारियों में जुट जाते हैं।













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