देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreखुशी कहीं भी, कभी भी, कैसे भी मिल सकती है बस इस खुशी को अपने आस पास महसूस कीजिए...जीवन हम सभी को यूं ही ईश्वर नहीं दिया पर क्या करें....हर जीव के अंदर एक मन नाम का मित्र भी है और शत्रु भी है वो यहां संसार की व्यवस्थाओं में इतना व्यस्त कर देता है... की जीव झूठे रिश्ते नाते ऐसे निभाता है जैसे यही हमारा जीवन का कर्तव्य हो....इस मन रूपी बहरूपिया क्या कहें इसका चक्र बड़ा प्रवल है बड़े से बड़े ज्ञानी को भी शून्य करने की शक्ति रखता है....हमें इस जीतना नही बस संतुलन में रखना है...यही जीवन का सारा है...आगे हरि इच्छा













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