देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के अचबल क्षेत्र में आतंकी हमले में शहीद हुए एसएचओ फिरोज अहमद डार को पुलवामा जिले के डोगरीपुरा गांव स्थित उनके पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। शहीद डार की पार्थिव देह जब उनके पैतृक गांव लाई गई और अंतिम यात्रा शुरू हुई, तो उनके जनाजे में शामिल लोगों को इस जवान की गई एक फेसबुक पोस्ट याद आ रही थी, जो उन्होंने 18 जनवरी, 2013 को लिखी थी। इस पोस्ट में डार ने लोगों को मरणोपरान्त आखिरी सफर की कल्पना करने को कहा था।
डार के पार्थिव शरीर को जब नहलाया जा रहा था और अंतिम यात्रा की तैयारी की जा रही थी, तब वहां मौजूद लोगों के आंसू रोके नहीं रूक रहे थे। करीब चार साल पहले लिखी उनकी पोस्ट के बारे में जो कोई सुनता भावूक हो जाता। पोस्ट में डार ने लिखा था कि क्या आपने एक पल के लिए भी रुक कर स्वयं से सवाल किया कि मेरी कब्र में मेरे साथ पहली रात को क्या होगा ? कभी उस पल के बारे में सोचना, जब तुम्हारे शव को नहलाया जा रहा होगा और तुम्हारी कब्र तैयार की जा रही होगी। जरा उस पल के बारे में भी सोचो, जब आपको कब्र में डाला जा रहा होगा।
शहीद डार की अंतिम यात्रा की जब तैयारियां हो रही थीं, तो उनकी दोनों बेटियां 6 वर्षीय अदा और दो वर्षीय सिमरन समझ ही नहीं पा रही थीं कि अचानक उनके घर के बाहर लोग क्यों जमा हो रहे हैं। डार की पत्नी मुबीना अख्तर और उनके वृद्ध माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।
आगे पढें, शहीद जवान फिरोज अहमद डार ने कविता में क्या-क्या लिखा था...
क्या आपने कभी थोड़ी देर रुककर अपने आप से पूछा...
'कल्पना करो ... अपनी कब्र में खुद को। उस अंधेरे में... अकेले?
सोचो उस क्षण के बारे में जब आपके शव को नहलाया जाएगा और कब्र में ले जाने के लिए तैयार किया जाएगा
सोचो उस दिन के बारे में जब लोग तुम्हारे लिए तुम्हारी कब्र पर रोएंगे
और तुम्हारा परिवार रो रहा होगा...सोचो उस वक्त के बारे में जब तुम्हें कब्र में डाला जाएगा
जरा सोचो... अपने आपको कब्र में
उस अंधेरे में
अकेले
इसके भी अंधेरे तुम मदद के लिए रोना
लेकिन...
ये बहुत छोटी जगह है और आपकी हड्डियों को कुचल जाती हैं
आप पांच वक्त की नमाज, संगीत सुनने का पछतावा करते हैं, आप पछतावा करते हैं हिजाब ना पहनने का
आप अल्लाह के फरमान की तामील नहीं करते हैं
लेकिन इससे भाग नहीं सकते...
आप अपने कर्मों के साथ अकेले होते हो
वहां कोई पैसे, कोई ज्वैलरी नहीं होगी, सिर्फ आपके कर्मों होंगे
अल्लाह हम सबकी रक्षा करेंगे और हमें कब्र की सज़ा से बचाएंगे... आमीन
साभार-khaskhabar.com













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