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शवों को नदियों में बहाना गलत, हिंदू धर्म में दाह संस्कार जरूरीः देवकीनंदन महाराज

शवों को नदियों में बहाना गलत, हिंदू धर्म में दाह संस्कार जरूरीः देवकीनंदन महाराज
-कोरोना संक्रमित शवों को बहाने से जल प्रदूषित होने का खतरा, ऐसा न करें
-अन्तिम संस्कार के लिये सरकार द्वारा जारी आर्थिक सहयोग की पीड़ित परिवार तक हो पहुंच

मथुरा। कोरोना महामारी के बीच नदियों में बहाये गये शवों पर रोष व्यक्त करते हुये भागवत प्रवक्ता देवकीनंदन महाराज ने इसे सनातन धर्म-संस्कृति के विरूद्ध बताया। एक वीडियो के माध्यम से उन्होने कोरोना से मृत व्यक्ति के परिजनों से ऐसे शवों का हिंदू पद्धिति अनुसार सावधानी से दाह-संस्कार क्रिया पूर्ण करने की अपील की है । उन्होने कोविड शव नदियों में बहाने या दफनाने से संभावित जल संक्रमण पर भी चिंता जतायी ।
 देवकीनंदन महाराज ने दुख प्रकट करते हुये कहा कि कोरोना महामारी ने समाज में तो दूरियाँ पैदा की ही हंै, साथ में हमारे पारिवारिक कर्तव्यों को भी तहस-नहस कर दिया है । भारत की जिस संस्कृति पर पूरा विश्व गर्व करता था आज उस देश में लोग अपने परिजनों के शवों को अमानवीयता से नदियों में बहा रहे हैं । यह शर्मनाक बात है । कहा कि हिंदू संस्कृति में अग्नि के बिना व्यक्ति का अन्तिम संस्कार अपूर्ण है ।
देवकीनंदन महाराज ने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना से मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिये आर्थिक सहयोग दे रही है । ग्रामीण क्षेत्रों में जिम्मेदार अधिकारियों एवं जागरूक नागरिकों को सरकार की इस योजना का लाभ पीड़ित परिवारों तक पहुँचाकर इस अमानवीय कृत्य को रोकना चाहिये । उन्होने कहा कि कोरोना गाईडलाईन के साथ मृतक की सुगति के लिये परिजनों द्वारा हिंदू धर्मानुसार दाह संस्कार किया जाना चाहिये ।  

 

नारद संवाद

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