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गूलर के हर हिस्से में औषधीय गुण, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को करता है कम

नई दिल्ली । उम्र बढ़ने के साथ शरीर में बदलाव आने लगते हैं। पहले जो जोश और ऊर्जा थी, वह कम होने लगती है। त्वचा की चमक घटने लगती है, झुर्रियां आने लगती हैं। पाचन कमजोर हो जाता है और कभी-कभी जोड़ों और हड्डियों में दर्द भी शुरू हो जाता है। इसी बीच आयुर्वेद में एक ऐसा पेड़ बताया गया है, जो इन सब समस्याओं में मदद कर सकता है। यह पेड़ है गूलर, जिसे वैज्ञानिक नाम से फिकस रासेमोसा कहते हैं। यह पेड़ दिखने में अंजीर जैसा है, लेकिन इसके गुण इसे आम पेड़ों से अलग बनाते हैं। आयुर्वेद में गूलर के फल, पत्ते, तना और छाल सभी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताए गए हैं। इसके पत्ते पित्त और कफ को संतुलित करते हैं और पाचन में मदद करते हैं। आयुर्वेद में पत्तों का प्रयोग लंबे समय से शरीर की ताकत और ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। गूलर के फल भी अलग-अलग समय पर अलग गुण देते हैं। कच्चे और पके फल दोनों का उपयोग किया जा सकता है। फल आकार में गोल होते हैं और दिखने में अंजीर जैसे लगते हैं।
गूलर की छाल और तना भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। छाल में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन कम करते हैं और यकृत की रक्षा करते हैं। पेड़ से निकलने वाला दूध भी फायदेमंद है। इसे बाहरी रूप से लगाने से घाव जल्दी भरते हैं, फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है और त्वचा संक्रमण दूर होते हैं।
वैज्ञानिक शोध में भी साबित हुआ है कि गूलर में मौजूद तत्व शरीर की कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं। इससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है, झुर्रियां कम आती हैं, त्वचा स्वस्थ रहती है और अंग अपनी सही गति से काम करते हैं। गूलर के सेवन से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और रक्त की सफाई भी होती है। यह डायबिटीज और दिल संबंधी बीमारियों जैसी समस्याओं में भी मदद करता है।
गूलर का सेवन पाचन के लिए भी बहुत लाभकारी है। यह कब्ज, पेट दर्द और पाचन समस्याओं में राहत देता है। इसके अलावा, शरीर की सूजन कम होती है। यह सब मिलकर शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और उम्र बढ़ने के असर को धीमा करते हैं।

 

साभार-khaskhabar.com

नारद संवाद

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