देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर हर ओर हल्ला मचा है। किसानों पर कार्यवाही की जा रही है। ग्राम प्रधानों के अधिकार छीने जा रहे हैं। यह हल्ला हवाई पदूषण पर है जो समय के साथ अपने आप कम हो जाएगा लेकिन कान्हा की नगरी का पानी अब पीने लायक नहीं रह गया है, इस पर सब चुप्पी साधे बैठे हैं। यहां तक वर्तामान प्रदेष सरकार ने जनपद का डार्क जोन को भी खत्म करते हुए गहरी बोरिंग की अनुमति दे दी जिससे जल दोहर की स्थिति और खराब हो गयी है। जिले के कई गांवों में पानी पीने लायक नहीं रह गया है। जल में पूर्णतरू घुले ठोस पदार्थ (टीडीएसरू टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर 4500 तक पहुंच गया है। यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। इससे लोगों को पेट, हड्डी और त्वचा के रोग हो रहे हैं।
जिले में लगातार भूगर्भ जलस्तर भी गिरता जा रहा है। फरह, बलदेव, नौहझील, राया ब्लाक डार्क जोन मेें हैं। जैसे-जैसे जलस्तर गिर रहा है, पानी और खराब हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य पानी का स्तर 300 से 500 तक टीडीएस का होना चाहिए। इससे अधिक टीडीएस वाला पानी पीने से पीलिया, पेट के रोग व हड्डियों में दर्द व त्वचा के रोग पनपने लगते हैं और बाल पकने लगते हैं। नंदगांव ब्लाक के गांव मानकी में टीडीएस 3500, नंदगांव के सिरथला में 3500, नंदगांव के गांव गिडोह में 3500, फरह ब्लाक के गांव हथौली मेें 4000, फरह के गांव पींगरी में 4000, फरह के गांव गढ़ी रामबल में 4200, चैमुहां ब्लाक के गांव सहार में टीडीएस का स्तर 3500, चैमुहां के गांव परखम में 3500, चैमुहां के गांव अकबरपुर में 3200, मथुरा ब्लाक के गांव लाढ़पुर में टीडीएस का स्तर 3200, मथुरा के टीडीएस का स्तर 3300, मथुरा के गांव राजपुर खादर में 3000, छाता के गांव गुहेता दसबिसा में 3600,
छाता ब्लाक के गांव गोहारी में टीडीएस 3500, बलदेव के गांव अवैरनी में 3200, बलदेव के गांव दघेंटा में 3500, बलदेव के गांव किशनपुर में 3400, राया ब्लाक के गांव ब्यौही में 3000,
राया के गांव खेडिया में टीडीएस 3300 पाया गया है।













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