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पंद्रह सौ परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

मथुरा। ब्रज में होने वाले धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशुद्धरूप से आस्था का सवाल हैं, लेकिन  सैकडों परिवारों की रोजीरोटी का जुगाड भी हैं। कुछ दिन के ये आयोजन तमाम परिवारों को वर्षभर का राशन पानी दे जाते हैं।  


ब्रज में कहावत है सावन भादौं की कमाई साल भर खाई, इस बार न सावान और नहीं भादौं में कोई कमाई हुई है। इससे साल भर का बजट ही बिगड गया है। बेरोजगारी से उपजी हताशा लोगों के चहरों पर साफ दिख रही है। मुड़िया पूनों का लक्खी मेला, जन्माष्टमी का त्योहार और यम द्वितीय को मिलाकर वर्ष भर में थोड़ा सा ब्रज की होली को भी अगर मान कर जोड़ें तो 2919 में पूरे वर्ष 5 करोड़ श्रद्धालु बृज मंडल में पधारे थे। अकेले जन्म स्थान पर जन्माष्टमी पर 2019 में 8 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किये थे।


लगभग मथुरा जनपद के 5 लाख लोगों की रोजी रोटी श्रद्धालु और पर्यटकों पर प्रत्यक्ष निर्भर करती है। जिनमंे फूल माली, किसान, किराना व्यापारी, होटल, धर्मशाला, आश्रम, गेस्ट हाउस, रेलवे स्टेशन से जुड़े कुली से लेकर स्टाल वाले तक बस स्टैंड के ढाबे और रिक्शा, तांगे, टेम्पू, टेक्सी, ई रिक्सा चालक एवं व्यपारियों की बात करंे तोमुकुट, पोशाक, बच्चांे के कुर्ता धोती, कंठीमाला, मूर्ति पूजा, धार्मिक ग्रंथ तस्वीर, खेल खिलोना, रेस्टोरेंट मिष्ठान का कारोबार अगर लगाएं तो लगभग 200 से 225 करोड़ का व्यापार सभी को मिलाकर होता है, जो इस साल बुरी तरह से पिट रहा है। पर्यटन विभाग के अनुसार केवल 1200 श्रद्धालु लोकडाउन के बाद से अब तक 2020 मे मथुरा आये है।


कोरोना महामारी के कारण राधाष्टमी मेले के निरस्त होने से 1500 परिवारों का कारोबार पूरी तरह चैपट हो गया है। मेले के दौरान करोड़ों का व्यापार होता था। मेले में श्रद्धालुओं के न आने से इन परिवारों के सदस्य बेहद परेशान हैं। 25 और 26 अगस्त को श्रीजी के धाम बरसाना में राधा अष्टमी मनाई जाएगी। इससे पहले लठामार होली पर भी कोरोना का ग्रहण लग चुका है।

 

इस बार लठामार होली पर भी इसका असर पड़ा। इन दोनों उत्सवों पर नगर में करोड़ो रुपये का व्यापार होता था। राधा की नगरी में मिष्ठान्न भंडार, कंठी माला पोषक की दुकान, चाय, लस्सी की दुकानें, चाट के ठेले, खोमचे लगाने वाले, टैक्सी चलाने वाले, मंदिरों का संचालन करने वाले गेस्ट हाउस वाले करीब 1500 परिवारों की रोजी रोटी का एकमात्र साधन ये दोनों ही त्योहार हैं। ये परिवार मेले से अपना व्यवसाय कर भोजन, बच्चों स्कूल फीस की आदि दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा करते थे। इस बार कोरोना महामारी के कारण इन परिवारों के समक्ष रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है।

नारद संवाद

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