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लम्हों में गुजर गया 5 दशकों का सफर, हिन्दी सिनेमा के दूसरे ‘हीमैन’ धर्मेन्द्र

लम्हों में गुजर गया 5 दशकों का सफर, हिन्दी सिनेमा के दूसरे ‘हीमैन’ धर्मेन्द्रअभिनेता धर्मेन्द्र को भले ही अब बॉलीवुड का ‘यमला, पगला, दीवाना’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन सालों तक वह रुपहले पर्दे के माचो हीरो और ही-मैन के रूप में भी देखे जाते रहे। दिग्गज अभिनेता का कहना है कि उन्हें लगता है कि पांच दशकों के अपने फिल्मी सफर को उन्होंने कुछ लम्हों में ही पूरा कर लिया है और अब उन्हें आश्चर्य होता है कि यह इतनी जल्दी कैसे हो गया। हाल ही में दिए अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘एक लंबा सफर लम्हों में गुजर गया..अगर हम इसे देखें, तो यह लंबा सफर रहा है और यह बस, कुछ लम्हों में ही गुजर गया। मैं अब सोचता हूं कि यह इतनी जल्दी क्यों गुजर गया। मैं अपने सहयोगियों और उस दौर के माहौल को याद करता हूं। मैं बहुत सी चीजें याद करता हूं। यह एक खूबसूरत सफर रहा है।’ पंजाब के रहने वाले धर्मेन्द्र ने 1960 में फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से फिल्मी दुनिया में आगाज किया था और दारा सिंह के बाद बॉलीवुड में ही-मैन के रूप में अपनी छवि बनाने में कामयाब रहे। अभिनेता जल्द ही फिल्म उद्योग में 60 साल पूरा कर लेंगे। उन्होंने सभी विधाओं की फिल्मों में काम किया। उन्होंने जहां बंदिनी, सत्यकाम में गंभीर किस्म का किरदार किया और राजा जानी और प्रतिज्ञा में हल्के-फुल्के किस्म का किरदार निभाया, वहीं वह शोले और चुपके-चुपके में लोगों को हंसाते-गुदगुदाते नजर आए। अनुपमा व यकीन जैसी फिल्मों में उनका बेहतरीन अभिनय कौशल दिखा। वहीं, हालिया समय में जॉनी गद्दार, वह लाइफ इन ए मेट्रो, अपने और यमला, पगला, दीवाना में नजर आए। धर्मेन्द्र अपनी विनम्रता और जड़ों से जुड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। अभिनेता का कहना है कि वह सुपरस्टार बनने की बजाय बेहतरीन इंसान बनने में यकीन करते हैं। उन्होंने अपने बेटों सनी देओल और बॉबी देओल को भी यही गुण दिए हैं और कहा कि वे यही बातें अगली पीढ़ी को सिखाते हुए इसे आगे ले जा रहे हैं। अभिनेता का मानना है कि प्रसिद्धि और चकाचौंध ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रहती। विनम्रता और जमीन से जुड़े रहना हमेशा आपके साथ रहता है। धर्मेन्द्र ने अपनी पत्नी हेमामालिनी के साथ सीता और गीता, शोले और ड्रीम गर्ल जैसी फिल्मों में काम किया है। शादी के बाद इस जोड़े ने अलीबाबा और 40 चोर, सम्राट और रजिया सुल्तान में काम किया। वह अपने जीवन पर फिल्म बनाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपने जीवन और सफर को दर्शाने के लिए उन्होंने उर्दू शायरी का रुख किया। धर्मेन्द्र ने कहा, मैं बहुत भावुक शख्स हूं, इसलिए यह शायरी मेरे लिए एक अच्छा जरिया है। जब कुछ कहा न जाए, जब कुछ सुना न जाए, तब मेरी तन्हाई मेरी खामोशी से और मेरी खामोशी मेरी तन्हाई से बातें कर लेती हैं। धर्मेन्द्र के पोते करण देओल फिल्म ‘पल-पल दिल के पास’ से अपने अभिनय की पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। अभिनेता (धर्मेन्द्र) लोगों से मिले प्यार और प्रशंसा से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि किताब लिखने से क्या लाभ होगा? वह लोगों तक पर्याप्त रूप से अपनी पहुंच बना चुके हैं और उन्होंने उनके दिलों को जीता है। यह पूछे जाने पर कि बॉलीवुड का अगला यमला, पगला, दीवाना कौन होगा तो उन्होंने कहा कि एक समय में सिर्फ एक धर्मेन्द्र ही यमला, पगला, दीवाना हो सकता है। अभिनेता अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म ‘ड्रीम कैचर’ में काम कर रहे हैं।

साभार-khaskhabar.com

नारद संवाद

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