देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कृष्ण जन्मभूमि व शाही मस्जिद ईदगाह मामले की सुनवाई को कोर्ट तैयार हो गया है। अब सिविल जज सीनियर डिवीजन मथुरा की अदालत में याचिका पर 30 सितंबर को सुनवाई होगी।
यह जानकारी भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दावा दायर करने वाले एडवोकेट विष्णुशंकर जैन ने दी है। 30 सितम्बर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मालिकाना हक मामले को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत ने सुनवाई होगी।
शुक्रवार को लखनऊ की रहने वाली रंजना अग्निहोत्री और त्रिपुरारी त्रिपाठी, सिद्धार्थ नगर के राजेश मणि त्रिपाठी और दिल्ली निवासी प्रवेश कुमार, करुणेश कुमार शुक्ला और शिवाजी सिंह ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को गलत बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में दावा पेश किया है।
याचिका के तहत कहा गया था कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से अवैध है और भगवान कृष्ण एवं उनके भक्तों की इच्छा के विपरीत है इसलिए उसे निरस्त किया जाए और मंदिर परिसर में स्थित ईदगाह को हटाकर वह भूमि मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी जाए।
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में न्यायालय से 13.37 एकड़ की जन्मभूमि का मालिकाना हक मांगा गया है। हालांकि 12 अक्तूबर 1968 को कटरा केशव देव की जमीन का समझौता श्रीकृष्ण जन्मस्थान सोसाइटी द्वारा किया गया। जिसके तहत 20 जुलाई 1973 को यह जमीन डिक्री की गई। याचिका में डिक्री को खारिज करने की मांग की गई है।
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से हिंदू समूह ने की है ईदगाह हटाने की मांग
याचिका में मंदिर के पास बनी ईदगाह को हटाने की मांग की गई है। करीब आधा दर्जन भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच पांच दशक पूर्व हुए समझौते को अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने और मस्जिद को हटाकर पूरी जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की मांग की है।













Related Items
वायु प्रदूषण पर संसद में गंभीर बहस: राहुल गांधी बोले—“बच्चों का भविष्य खतरे में”, सरकार ने कहा—“हर सुझाव पर चर्चा को तैयार”
देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्साह : जयपुर के गोविंद देव जी से लेकर हरिद्वार तक, मंदिरों में लगा भक्तों का तांता
भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर में कम होकर वित्त वर्ष 25 के लक्ष्य का 29.4 प्रतिशत रहा