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MATHURA : कार्यक्रमों में हुआ कोरोना की गाइड लाइन का उल्लंघन

मथुरा। तो कोरोना केसरिया गमछे से डरता है और खादी और खाकी की जुगल बंदी से भी। तभी तो जहां कंधों पर केसरिया गमच्छा होता है वहां कोरोना के नियम कायदे अपने आप निष्प्रभावी हो जाते हैं। न एक मीटर की दूसरी का नियम लागू होता है, न चहरे पर मास्क लगाने की अनिवार्यता रह जाती है।

अधिकतम लोगों के एकत्रित होने के कायदे भी बदल जाते हैं और किसी कार्यक्रम की पूर्व अनुमति लेने का नियम भी लागू नहीं होता। इतना ही नहीं इन आयोजनों में खाकी न सिर्फ मौजदूगी दर्ज करा रही है बल्कि कानून को अपनी तरह से परिभाषित करने वालों की हां में हां भी मिलाती दिखती है।

मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे व्यक्ति को जितना कोरोना का खतरा है, उतना केसरिया गमछा डाले कंधों को नहीं रह जाता। यही वजह है कि लाॅकडाउन में 4.1 करोड से ज्यादा के चालान करने वाली खाकी जब सत्ताधारी दल के कार्यक्रमों में शिरकत करती है तो नियम बदल जाते हैं। खाकी वाले खुद मास्क लगाने से सिर्फ परहेज करते हैं बल्कि दूसरों को भी ऐसा करने से टोकना जरूरी नहीं समझते।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर जनपद में जगह जगह हुए कार्यक्रमों में कोरोना की गाइड लाइन की धज्जियां उडती रहीं और खाकी न सिर्फ मौन रही बल्कि वह ऐसा करने के लिए लोगों को मौन स्वीकृति भी देती दिखी।


बल्देव में आयोजित कार्यक्रम में थाना बल्देव पुलिस भी मौजूद रही। यहां वृक्षारोपण हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चित्र पर चिलक आदि का कार्यक्रम हुआ। इस दौरान थाना बल्देव पुलिस की मौजूदगी में नियमों की धज्जियां उडती रहीं।

थाना बरसाना में एक सामाजक संगठन ने थाना बरसाना पुलिस कर्मियों का स्वागत किया। इस दौरान भी किसी ने मास्क पहन कर लोगों को यह संदेश देने की कोशिश नहीं की किस नियम सभी के लिए बराबर है। खादी हो या खाकी।  

नारद संवाद

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