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स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में बुधवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में चार और आतंकवादी मारे गए। पुलिस ने कहा कि वे हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के थे। एक सप्ताह से भी कम में शोपियां में तीसरी बड़ी मुठभेड़ है, जिसमें 13 आतंकवादी मारे गए।  

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के दिल्ली के अस्पताल में सिर्फ दिल्ली के लोगों के इलाज देने की बात पर प्रश्नचिह्न् लगाए हैं। उनहोंने इस मामले में केन्द्र सरकार को दखल देने की मांग उठाई है। मायावती ने सोमवार को ट्वीट करते हुए लिखा, दिल्ली देश की राजधानी है। यहां पूरे देश से लोग अपने जरूरी कार्यो से आते रहते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाता है तो उसको यह कहकर कि वह दिल्ली का नहीं है इसलिए दिल्ली सरकार उसका इलाज नहीं होने देगी, यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। केन्द्र को इसमें जरूर दखल देना चाहिये। इससे पहले मायावती ने एक अन्य ट्वीट कर कहा, "अनलॉक-1 के तहत आज से जो भी स्थल व बाजार आदि खोले जा रहे हैं, वहां जाने के लिए लोगों को सरकारी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। यदि बहुत जरूरी है तब ही वहां जाना चाहिए, वरना जाने से बचना चाहिये। बीएसपी की उनके हित में यही सलाह है।" ज्ञात हो कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि बाहरी मरीजों का इलाज अब राज्य सरकार के अस्पतालों में नहीं होगा। दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में अब सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही इलाज होगा। केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाले अस्पतालों जैसे एम्स समेत अन्य में कोई भी मरीज इलाज करा सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली कैबिनेट ने फैसला लिया है कि राज्य सरकार के अस्पताल अब दिल्ली के लोगों के लिए होंगे। केंद्र सरकार के अस्पताल में कोई भी इलाज करा सकता है। केजरीवाल ने कहा कि ऐसे में अगर दिल्ली के अस्पताल बाहर वालों के लिए खोल दिए तो दिल्ली वालों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 90 फीसदी लोगों ने कहा कि जब तक कोरोना मामले हैं तब तक दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ दिल्लीवासियों का इलाज हो। इस बाबत पांच डॉक्टर की एक कमेटी बनाई गई थी उन्होंने अपनी रिपोर्ट दी है। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ। भले ही असली अनामिका शुक्ला मायावी हैं, लेकिन पांच और जिलों की पुलिस ने प्रिया सिंह के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है, जो उत्तर प्रदेश के 25 कस्तूरबा गांधी बाल विद्यालय में एक साथ काम करने में उसकी मदद कर रही थी। यह एफआईआर रायबरेली, अंबेडकरनगर, बागपत, अलीगढ़ और सहारनपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) की शिकायतों पर दर्ज की गई है।  

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जयपुर। लॉकडाउन के बाद आजीविका छिनने की पीड़ा झेल रहे श्रमिकों को आसानी से रोजगार मिल सके तथा श्रमिकों की कमी का सामना कर रहे उद्योगों को सुगमता से श्रमिक उपलब्ध हो सकें इसके लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने इस उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा विकसित राजकौशल पोर्टल तथा ऑनलाइन श्रमिक एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज का शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए शुभारंभ किया। उल्लेखनीय है कि गहलोत ने बीते दिनों कोरोना संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में प्रदेश से श्रमिकों के पलायन तथा प्रवासी श्रमिकों के आगमन को देखते हुए ऑनलाइन लेबर एक्सचेंज बनाने के निर्देश दिए थे। वीडियो कांफ्रेंस के दौरान प्रमुख शासन सचिव सूचना प्रौद्योगिकी श्री अभय कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मात्र दो सप्ताह में ही यह पोर्टल तैयार किया गया है। आवश्यकता को देखते हुए इस पोर्टल को जल्द ही मोबाइल ऎप प्लेटफार्म पर भी लाया जाएगा। शासन सचिव श्रम डॉ. नीरज के. पवन ने प्रस्तुतीकरण में बताया कि इस पोर्टल में 12 लाख प्रवासी श्रमिकों के साथ ही नियोजन कार्यालयों तथा भवन एवं अन्य संनिर्माण बोर्ड के पंजीकृत श्रमिकों, आरएसएलडीसी एवं आईटीआई में प्रशिक्षित कुल 53 लाख से अधिक श्रमिकों एवं जनशक्ति का डाटा शामिल किया गया है। साथ ही करीब 11 लाख से अधिक नियोक्ताओं को भी इस पर पंजीकृत किया गया है। इसके अलावा कोई भी श्रमिक इस पोर्टल पर स्वयं का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। साभार-khaskhabar.com

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भोपाल मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या नौ हजार के करीब पहुंच गई है। बीते 24 घंटों के दौरान 234 नए मरीज सामने आए, वहीं मरने वालों की संख्या 384 हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक, राज्य में अब मरीजों की संख्या 8996 हो गई। इंदौर में 54 नए मरीज पाए जाने से इस विकसित शहर में मरीजों की संख्या बढ़कर 3687 हो गई है और राजधानी भोपाल में मरीजों की संख्या 1682 हो गई है। इसी तरह उज्जैन में मरीजों की संख्या बढ़कर 707 हो गई है। स्वास्थ्य बुलेटिन में दिए गए आकड़ों के अनुसार, राज्य में बीते 24 घंटों में सात मरीजों की मौत होने से मरने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 384 हो गई है। अब तक इंदौर में 149, भोपाल में 61, उज्जैन में 59 मरीजों की मौत हुई है। राहत की बात यह कि अब तक 5878 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। बीते 24 घंटों में 241 मरीज स्वस्थ हुए। इंदौर में अब तक 2243 और भोपाल में 1157 मरीज स्वस्थ हुए हैं। स्वस्थ हुए लोग अगर चाहें तो अपना 400 एमएल प्लाज्मा दान कर कई गंभीर मरीजों की जान बचा सकते हैं। साभार-khaskhabar.com

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यूपी के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने आज बताया की प्रदेश में एक्टिव कोरोना केस 3828 हैं और 5648 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं। अभी तक कोरोना पॉजिटिव से 257 लोगों की मौत हुई है: यूपी के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद आगे उन्होंने बताया प्रदेश में एक्टिव कोरोना केस 3828 हैं और 5648 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं। अभी तक कोरोना पॉजिटिव से 257 लोगों की मौत हुई है। हम आशा कार्यकर्ताओं की मदद से राज्य में लौटने वाले प्रवासी मजदूरों पर नज़र रख रहे हैं। 12,80,833 मज़दूर अब तक ट्रैक किए जा चुके हैं, जिनमें से 1,163 सिमटोमेटिक हैं। उनके नमूने परीक्षण के लिए एकत्र किए गए हैं। प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 502 नए मामले सामने आए हैं। इसी जॉइंट प्रेस कांफ्रेंस में यूपी मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने आज बताया उत्तर प्रदेश CM ने आज कहा कि भारत सरकार की तरफ से आए दिशा-निर्देशों के क्रम में धर्म स्थलों को खोले जाने से पूर्व प्रशासन व पुलिस के अधिकारीगण धर्म स्थलों के प्रबंधन से जुड़े लोगों से संवाद करें, उन्हें सभी सावधानियां सुनिश्चित करने की जानकारी दें :यूपी मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी उत्तर प्रदेश CM ने आज कहा कि प्रत्येक धर्म स्थल पर सेनिटाइजर, इंफ्रारेड थर्मामीटर तथा पल्स ऑक्सीमीटर की व्यवस्था होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि धर्म स्थल के अंदर एक बार में 5 से ज्यादा श्रद्धालु न हों। मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया है कि ऐसा जनपद जहां 25 हजार या इससे ज्यादा कामगार और श्रमिक लौटे हैं, वहां स्किल मैपिंग कार्य तेजी से पूरा किया जाए। 1620 ट्रेन अब तक प्रदेश में आई हैं, 4 ट्रेन आज भी आ रही हैं, अब तक प्रदेश में 21 लाख 90 हजार लोग सिर्फ ट्रेनों से आए हैं। मुख्यमंत्री जी ने कामगारों/ श्रमिकों को रोज़गार उपलब्ध कराने के लिए एक पोर्टल तैयार करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों के अलावा विभिन्न सरकारी विभागों तथा संस्थानों, जहांकामगारों/श्रमिकों की जरूरत है, वहां इन्हें रोजगार देने के प्रयास किए जाएं। साभार-khaskhabar.com

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जयपुर। राज्य सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित की गई 10वीं और 12वीं कक्षाओं के विभिन्न विषयों की बोर्ड परीक्षाएं कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समुचित व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय के बाद अब 10वीं और 12वी कक्षाओं के विभिन्न विषयों की शेष रही परीक्षाओं की तिथियों को कार्यक्रम राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन परीक्षाओं के दौरान कोरोना महामारी के संदर्भ में जारी हैल्थ प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षार्थियों और अध्यापकों द्वारा मास्क तथा सैनिटाइजर के उपयोग की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, विद्यार्थियों के परीक्षा केन्द्र पर आवागमन और परीक्षा के दौरान सोशल डिस्टेसिंग के नियम की सख्ती से पालना हो। गहलोत ने आवश्यकता के अनुसार परीक्षा केन्द्रों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया और कहा कि जिन स्कूल भवनों में क्वारंटाइन सुविधाएं संचालित की जा रही है, उन भवनों को परीक्षा से पहले तय प्रोटोकॉल के अनुसार सैनिटाइज किया जाए ।   साभार-khaskhabar.com

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चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के कार्यालय खोलने का निर्णय लिया है ताकि लॉकडाऊन के कारण दो महीने से बंद पड़े प्रशासनिक कार्यों को निपटाया जा सके। एक सरकारी प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, स्कूल मुखिया/प्रभारी एवं डीआईईटी, बीआईईटी, जीईटीटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी स्कूलों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों के कार्यालय समयानुसार ही खोले जाएं। उन्होंने बताया कि स्कूल मुखियाओं को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, हरियाणा द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सोशल-डिस्टेंसिंग बनाने, मास्क लगाने, सैनेटाइजर आदि का प्रयोग कर स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा सभी स्कूलों को साबुन, सैनेटाइजर, फेस मास्क, हैंडवाश, टॉयलेट क्लीनर आदि खरीदने के लिए 2500 रूपए से लेकर 4000 रूपए तक की एकमुश्त राशि भी दी जा रही है। प्रवक्ता के अनुसार अगर स्कूल मुखिया को मिड-डे मिल व पाठ्य-पुस्तकों के वितरण या स्कूल के किसी अन्य कार्य के लिए सहयोग की आवश्यकता है तो किसी प्रभारी अध्यापक को बुला सकता है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, क्रोनिक रोग से ग्रस्त स्टॉफ के सदस्यों को अभी स्कूल आने से छूट दी गई है। स्कूल के कार्यालयों, अनिवार्य फर्नीचर व कक्षों को सैनेटाइजर करना जरूरी है। उन्होंने आगे जानकारी दी कि नए शैक्षणिक वर्ष के लिए सभी सरकारी स्कूलों में एक सप्ताह के अंदर स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों की प्रथम बैठक का आयोजन कर दाखिला अभियान, शत-प्रतिशत नामांकन, अवस्थांतर तथा ड्रापआऊट रेट को शून्य करने की योजना करने के निर्देश दिए हैं। साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज की अध्यक्षता में यहां मंत्रिमंडल की उप-समिति की कृषि तथा आयुर्वेद विभागों के साथ एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विकासात्मक मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि शिमला, धर्मशाला, मण्डी और हमीरपुर में वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र की स्थापना की जाएगी, जिसमें असिस्टिड लिविंग, कुशल नर्सिंग देखभाल और आयुर्वेदिक केंद्र की सुविधा होगी। यहां एक कौशल हस्तांतरण केंद्र भी होगा, जहां वरिष्ठ नागरिक युवाओं को कौशल प्रदान करेंगे। जिला आयुर्वेद, चम्बा में होम्योपैथी, नेचुरोपैथी एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना भी की जाएगी तथा योग को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। स्वास्थ्य रिजाॅर्ट, योग, पंचकर्मा एवं आयुर्वेद केंद्रों के विकास द्वारा चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। उप-समिति के सदस्य एवं उद्योग मन्त्री बिक्रम सिंह ने कहा कि किसानों व बागवानों के कल्याण और उन्नति के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आय को दोगुना किया जाए तथा उनके उत्पादों को बेहतर विपणन रणनीति के अनुसार बाजारों तक पहुंचाया जा सके। उप-समिति द्वारा कृषि भूमि के मुआवजे के भुगतान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में किसानों को लाना, मार्केटिंग बोर्ड व मार्केट समितियों की कार्य प्रणालियों में सुधार लाना, ई-मार्केटिंग प्रणाली को प्रभावशाली बनाना, महिला किसानों के लिए ‘जननी प्रोग्राम’ के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा देश एवं विदेश के बड़े कृषि विश्वविद्यालयों के साथ फैलोशिप एवं इंटर्नशिप कार्यक्रमों की शुरूआत करने जैसे विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार कर उचित कदम उठाएगी। उप-समिति के सदस्य एवं वन मन्त्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में 19 मंडियों को ई-नाम प्रणाली के अंतर्गत लाया गया है, जिसमें प्रदेश में 59 उत्पादों का व्यापार किया जा रहा है, जिनमें मुख्यतः फल व सब्जियां शामिल हैं। अब तक 119554 किसान व 1947 व्यापारी ई-नाम द्वारा कृषि उपज का क्रय-विक्रय कर रहे हैं। मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत वर्ष 2019-20 के लिए अब तक 18.18 करोड़ रुपये की धनराशि लाभार्थियों के लिए सहायता के रूप में खर्च की गई। इस अवसर पर मंत्रिमंडल की उप-समिति के सदस्य सचिव एवं सचिव सामान्य प्रशासन देवेश कुमार तथा कृषि और आयुर्वेद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पुलिस विभाग को शराब की हर तरह की तस्करी, नाजायज़ शराब बनाने और बेचने वालों के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही करने के आदेश दिए, जिससे ऐसी गतिविधियों से राज्य को राजस्व के नुकसान से बचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने ऐसे सब-डिविजऩ के डी.एस.पी. और एस.एच.ओज़ के विरुद्ध तुरंत कार्यवाही करने के निर्देश दिए, जिनके इलाकों में ऐसी गतिविधियां सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि नाजायज़ शराब बनाने / तस्करी करने / बेचने आदि से सम्बन्धित किसी भी तरीके की ग़ैर-कानूनी गतिविधि का समर्थन करने या लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों / कर्मचारियों के विरुद्ध भी सख़्त कार्यवाही के आदेश दिए। मुख्यमंत्री के आदेशों पर डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को 23 मई तक जि़ला और पुलिस थानों के स्तर पर शराब के तस्करों / सप्लाई करने वालों / नाजायज़ शराब बनाने वालों की पहचान करने के लिए ज़रूरी हिदायतें जारी की हैं। अधिकारियों को ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन और महामारी अधिनियम से सम्बन्धित धाराओं समेत कानूनी कार्यवाही करने के लिए कहा। डी.जी.पी. ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोविड के फैलाव को रोकने के लिए कफ्र्य़ू / लॉकडाउन के कारण विश्व और भारत में आर्थिक और वित्तीय दबाव के कारण राज्य सरकार को हर संभव राजस्व जुटाने की ज़रूरत है। इस कारण सरकार राज्य से बाहर से शराब की तस्करी करने या नाजायज़ शराब बनाने की सूरत में राजस्व का कमी सहन नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री के निर्देशों की पैरवी के तौर पर पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को सभी थानों ख़ासकर सरहदों के नज़दीकी क्षेत्रों के थानों के प्रमुखों (एस.एच.ओज़) को हर समय चौकस रहने और पंजाब के अंदर शराब की तस्करी को रोकने को यकीनी बनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। पंजाब पुलिस प्रमुख द्वारा चेतावनी दी गई है कि इस उद्देश्य में असफल होने की सूरत में सम्बन्धित थाना प्रमुख का अन्य जगह तबादला किया जाएगा और कसूरवार मानते हुए उसके खि़लाफ़ अपेक्षित विभागीय कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी अधिकारी / कर्मचारी शराब आदि की तस्करी / नाजायज़ शराब बनाने और सप्लाई करने की ग़ैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करता पाया गया तो उसके खि़लाफ़ मुख्यमंत्री के आदेशों के अनुसार सख़्त कार्यवाही होगी। राज्य के पुलिस प्रमुख ने कहा कि पुलिस कमिशनरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को सब-डिवीजऩों के उप -पुलिस कप्तानों (डी.एस.पीज़) और थाना प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्ऱेंस करके उनको यह स्पष्ट करने के लिए निर्देश दिए हैं कि यदि उनके अधिकार क्षेत्र में शराब की कोई भी ग़ैर-कानूनी फैक्ट्री चलती पाई गई, जैसे कि हाल ही में खन्ना और राजपुरा में हुआ, तो सम्बन्धित अधिकारी का अन्य क्षेत्र में तबादला करके उसके खि़लाफ़ कानूनी / विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा ऐसा अधिकारी भविष्य में एस.एच.ओ बनने और सार्वजनिक डिलिंग की नियुक्ति के लिए अयोग्य होगा। डी.जी.पी ने बताया कि सभी पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को कहा गया है कि वह अंतरराज्यीय तस्करी को मुकम्मल रूप में रोकने के लिए रोज़ाना हर स्तर पर निगरानी करें। इसके अलावा सभी पुलिस कमिश्नर और आई.जी. और डी.आई.जी. द्वारा उनके क्षेत्रों के अधीन आने वाले जि़लों की इस बाबत प्राप्तियों सम्बन्धित महीनावार रिपोर्ट समेत अर्ध सरकारी पत्र लगाकर बिना देरी हर महीने की 5 तारीख से पहले-पहले अतिरिक्त डायरैक्टर जनरल पुलिस ( ए.डी.जी.पी. कानून और व्यवस्था) को भेजी जाएगी। पंजाब पुलिस के प्रमुख ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जि़ला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए कि वह आबकारी विभाग के अधिकारियों और ठेका लाइसेंसधारकों के साथ लगातार संपर्क में रह कर फीडबैक लेने और नशा-तस्करों / सप्लाई करने वालों / नाजायज़ शराब बनाने वालों पर नकेल कसने के लिए पूरी मुस्तैदी और संजीदगी से यत्न करें। डी.जी.पी. ने चेतावनी दी कि इसमें किसी प्रकार की असफलता को गंभीरता से लिया जाएगा। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । पंजाब सरकार ने प्राईवेट स्कूलों को 2020-21 की फ़ीसों में साल 2019 -20 के दौरान ली गई फ़ीसों के मुकाबले कोई वृद्धि न किये जाने की सलाह दी है। राज्य में सभी प्राईवेट और अनएडिड (ग़ैर सहायता प्राप्त) स्कूलों के प्रबंधकों /प्रिंसिपलों को लिखे पत्र में डायरैक्टर, पब्लिक इंस्ट्रकशनज़(सैकेंडरी शिक्षा) सुखजीत पाल सिंह ने बताया कि यह फ़ैसला तालाबन्दी के मद्देनजऱ लिया गया है। इस पत्र में स्कूलों के प्रबंधकों / प्रिंसिपलों को कहा गया है कि उनकी तरफ से बच्चों के माता-पिता को मासिक या त्रैमासिक फीस भरने की छुट दी जाये। स्कूलों प्रबंधकों को उन बच्चों के मामले को और भी ध्यान और हमदर्दी से विचारने के लिए कहा गया है जिनके माता-पिता की आजीविका तालाबंदी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे विद्यार्थियों को फीस में रियायत / फीस माफ करने के लिए भी कहा गया है और फीस न भरे जाने पर किसी भी बच्चे की शिक्षा (ऑनलाइन या रेगुलर) प्राप्ति को न रोके जाने के लिए भी कहा गया। यह भी हिदायत की गई है कि स्कूल प्रबंधन की तरफ से किसी भी अध्यापक को हटाने या मासिक वेतन में कटौती या टीचिंग / नॉन-टीचिंग स्टाफ के कुल खर्चों में कोई कटौती न की जाये। स्कूल ऑनलाइन / डिस्टैंस लर्निंग प्रदान करने का यत्न करेंगे जिससे कोविड - 19 के मद्देनजऱ मौजूदा या भावी तालाबन्दी के कारण शिक्षा पर बुरा प्रभाव न पड़े। यह भी कहा गया है कि स्कूलों की तरफ से गर्मियों की छुट्टियों को छोड़ कर तालाबंदी/कफ्र्यू के दौरान कोई फीस न ली जाये। हालाँकि, जिन स्कूलों ने तालाबन्दी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की है या प्रदान कर रहे हैं, वह बिल्डिंग के खर्चे, परिवहन के खर्चे, खाने के खर्चे आदि के सिवाय सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर । लॉकडाउन के दौरान निरंतर कार्य करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने राजस्थान में एक करोड़ 28 लाख से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर का वितरण किया। साथ ही 48 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की गई। इस विषम परिस्थिति में भी सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने में इन कंपनियों के वितरकों और घर-घर सिलेन्डर पहुंचाने वाले गैस बॉयज का सर्वाधिक योगदान रहा। तीनों ही तेल कंपनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा कस्टमर अटेंडेंट ने भी ‘हर काम देश के नाम’ की भावना के साथ काम किया। देश की कई नामचीन हस्तियों ने गैस बॉयज और कस्टमर अटेंडेंट के जज्बे की सराहना की है। राजस्थान में तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक सुनील गर्ग ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा कुल 12 तेल टर्मिनल डिपो तथा 11 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट का लगातार संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य में कुल एक हजार 373 एलपीजी वितरक हैं जो लगभग एक करोड़ 62 लाख सक्रिय एलपीजी ग्राहकों को सेवा दे रहे हैं। राज्य भर में 4035 रिटेल आउटलेट्स लगातार आम जनता की ईंधन की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। सुनील गर्ग ने बताया कि ईंधन और सिलेन्डर की आपूर्ति से संबन्धित सभी सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम से संबन्धित सभी दिशा-निर्देशों का भी पालन किया जा रहा है। इसलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। कोरोना के कारण लॉकडाउन जैसे मुश्किल हालात में भी ईंधन एवं एलपीजी की आपूर्ति से संबन्धित अधिकारी, कर्मचारी, एलपीजी वितरक, रिटेल आउटलेट्स मालिक और इनके कर्मचारी, सिलेंडर डेलीवरी बॉयज तथा ट्रक और टैंकर चालक ने जिस निष्ठा, प्रतिबद्धता और हौसले का परिचय दिया है इसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। गर्ग ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इनका मनोबल बनाए रखने की हर संभव कोशिश करें।   साभार-khaskhabar.com  

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