देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कला, साहित्य, संस्कृति को समर्पित संस्था ‘सारथी’ द्वारा वैष्णव कुम्भं बैठक में आयोजित ‘ब्रजरस संस्कृति उत्सव’ में ब्रजक्षेत्र के कवियों-कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। श्रद्धालुओं ने ब्रजभाषा में काव्यपाठ, लावनी और रामलीला प्रसंग मंचन का खूब आनंद उठाया । संस्था ने कवियों एवं कलाकारों का सम्मान कर स्मृति चिन्ह प्रदान किये।
कुम्भ मेला क्षेत्र स्थित संस्कृति विभाग पाण्डाल में रूबिया खान ने ‘ओ मेरी मैया मात शारदे, मैं तेरा गुण गाऊँगी...’ से सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कवि सम्मेलन का शुभारम्भ किया। ब्रजभाषा के गीतकार सुनील पाराशर ने ‘राधे-राधे बोलकर, जीवन जायें संवर, काहे डोले दर-दर, शरण में आय लै....’ कविता पढ़ी तो पाण्डाल में राधे-राधे के जयकारे गूंज उठे।
कवि उमाशंकर राही ने ‘‘मिला है जन्म भारत में, यह सौभाग्य है तेरा, वतन की आन बनकर जी, वतन की शान बनकर जी....’’ आदि रचनायें प्रस्तुत कीं ।
ओज कवि डा. रमाशंकर पाण्डेय ने ‘‘गुनाहों की तरफदारी कभी अच्छी नहीं होती, जिंदगी पाप से भारी कभी अच्छी नहीं होती....’’ कविता पढ़ी। देवी प्रसाद गौड़ ने ब्रजभाषा में हास्य व्यंग की रचनायें पढ़कर श्रोताओं को खूब हँसाया ।
डाॅ. नितिन मिश्रा, उपेन्द्र झा, राणा मुनि प्रताप, मोहित मनोहर जोशी, विनीत गौतम, दिलीप बघेल, आदि ने काव्यपाठ किया। इससे पूर्व बाल कलाकार चिंकी वर्मा ने अपनी नृत्य प्रस्तुति से कार्यक्रम की शुरूआत की। गायक कलाकार सम्पत लाल जोशी ने जोशीला लावनी गायन कर दशर्कों को रोमांचित कर दिया। डाॅ. कन्हैया लाल रसिक ने बाॅंसुरी वादन किया। अन्त में श्री बालाजी आदर्श रामलीला मण्डल के कलाकारों ने रामलीला में धनुष यज्ञ लीला का मंचन कर दशर्कों की वाहवाही लूटी ।
संस्था पदधिकारियों ने कवि एवं कलाकारों को पटका पहनाकर, स्मृति चिन्ह प्रदान किया । सचिव मफतलाल अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि डाॅ अशोक अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि अमित अग्रवाल सर्राफ, जगदीश वर्मा ‘समंदर’, ललित अग्रवाल, विकाश शर्मा, रेखा अग्रवाल, सौरभपाल आदि उपस्थित रहे ।













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