BREAKING NEWS

नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या ग्यारह सौ के पार, सर्च ऑपरेशन जारी || राजस्थान में खत्म हुआ मानसून ब्रेक : बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से फिर सक्रिय होगा मानसून, 4 सितंबर से बारिश में तेजी के आसार || मथुरा : जन्माष्टमी गलियों और चौराहों से आसमान तक रहेगी ब्रज संस्कृति की धूम || मथुरा : 12 सितंबर को आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत

वरदानः तकनीक के उपयोग ने अन्नदाता को बडे नुकसान से बचाया

मथुरा। तकनीक का उपयोग कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रहा है। मौसम के पूर्व अनुमान ने इस बार किसानों को बडे नुकसान से बचा लिया। जनपद में इस समय खेतों में बाजरा और धान की फसल पकी हुई खडी है जबकि आलू और सरसों की बुआई के लिए खेत तैयार है। पिछले पखपडे कई दिन तक हुई रिमझिम बरसात ने किसानों को मौका दे दिया था कि वह आलू और सरसों की फसल के लिए अपने खेतों को तैयार कर सकें। किसानों तत्परता से यह काम पूरा भी किया, लेकिन खेत तैयार होने के बाद भी किसान बुआई से ठिठक गए। इसी बीच किसानों बरसात की चेतावनी मिल गई। गांवों में भी अब बडी संख्या में किसान मौसम बुलटेन का सहारा ले रहे हैं। मौमस विभाग की पूर्व चेतावनी के बाद किसानों ने आलू और सरसों की बुआई को कुछ दिन के लिए टाल दिया। जबकि खेत मंे खडी बाजरा की फसल को भी काटने के लिए नहीं पहुंचे और मौसम समान्य होने का इंतजार करने का फैसला किया। हालांकि रूकरूक कर कभी रिमझिम, कभी झमाझम हो रही बरसात ने किसानांे की परेशानी बढा दी है। इस बरसात से धान और बाजरा की फसल में नुकसान है। वहीं आलू और सरसों की फसल की बुआई भी पिछेती हो रही है। कुछ किसानों ने बाजरा की फसल को काट भी लिया है। वहीं मंडी में धान की आवाक भी शुरू हो गई है। किसान नीरज सिंह ने बताया कि पांच बीघा खेत मे ंवह सरसों की फसल बोने जा रहे हैं। खेत बुआई के लिए पूरी तरह तैयार हैं अगर मौसम का पूर्व अनुमान नहीं मिलता तो वह बुआई कर चुके होते और उन्हें इसका बडा आर्थिक नुकसान उठाना पडता। वहीं करीब 50 बीघा में आलू करने जा रहे जिला पंचायत सदस्य खेती किसानी का काम देख रहे देवराज सिंह का कहना है कि लाखों रूपये का नुकसान हो सकता था मौसम का पूर्व अनुमान मिलने के कारण नुकसान बच गया। प्रगतिशीन किसान प्रथ्वी सिंह का कहना है कि किसान अब जागुरूक हो गया है। प्राकृतिकतौर पर पूरी तरह से नुकसान को टाला तो नहीं जा सकता फिर भी तकनीक किसानों को पूरी मदद कर रही है। अगर बाजरा की कटाई हो जाती तो खेतों में पडी बाजरा की बालियों को बचाना मुश्किल हो जाता। गुणवत्ता पर भी असर पडता और फिर किसान की फसल भी कम दामों पर बिकती।
 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

जिन इलाकों में लगे होते हैं खूब सारे पेड़, वहां बुजुर्ग आबादी रहती है डिप्रेशन से कोसों दूर: स्टडी में खुलासा

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More