देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreआज का विचार : इस धरा पे प्रत्येक जीव अपने अपने प्रारब्ध को लेकर जन्मा है पर कोई भी जीव कर्म से विमुख नही हो सकता। इसलिए जीव को सत कर्म करने चाहिए कलिकाल में माया का बहुत बड़ा प्रकोप है और मोह का....इसलिए आप इस से बच तो नही सकते परंतु कोशिश जारी रख सकते है... क्योंकि प्रयास ही सफलता की कुंजी कहलाता है। जीव को अहंकार, मोह से तो बचना चाहिए ताकि वो अपना कल्याण करवा सके। खेर जीवन का एक ही आधार है प्रत्येक जीव का.…. वो है हरिनाम......होगा वो ही जो श्री हरिहर ने लिखा है....पर कर्म को सही करें ताकि कुछ तो सुधार जा सकें......आए हरिहर इस....













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