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मथुरा(ब्यूरो)। धान की फसल जनपद में कसेसी बीमा की जद में नहीं आती है। इसके बाद भी केसीसी धारकों को बीमा कंपनी से बीमा दिलाने का आष्वासन अधिकारी लगातार दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब गोवर्धन क्षेत्र के विधायक कारिंदा सिंह भी इसे सच मानकर राजीराजी वापस लौट गये।
जनपद में करीब 50 हजार हैक्टेयर रकवा में इस बार धान की फसल रोपी गई है। बरसात अच्छी होने से अभी तक फसल अच्छी थी, लेकिन बाली पकने से पहले ही धान की फसल में रोग लग गया और गोवर्धन और छाता क्षेत्र में ही 5 हजार हैक्टेयर से अधिक फसल इस कीट की वजह से बेकर हो चुकी है। खराब हुई फसल का मुआवजा दिलाये जाने की मांग को लेकर सोमवार को गोवर्धन विधान सभा क्षेत्र के विधायक कारिंदा सिंह के साथ सैकडों की संख्या में किसान कलक्ट्रेट पहुंचे और डीएम को खराब हुई फसल के नमूने दिखाने के साथ ही मुआवजे की मांग संबंधी ज्ञापन सौंपे। जिलाधिकारी ने केसीसी धारक किसानों को मुआवजे का अष्वासन दे कर वापस भेज दिया। इस दौरान विधायक कारिंदा सिंह भी जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र के आष्वासन से संतुष्ट नजर आ रहे थे।
इससे पहले गोवर्धन और छाता तहसील के एसडीएम भी किसानों को इसी तरीके के आष्वासन दे चुके हैं। जबकि जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि धान की फसल केसीसी बीमा में षामिल ही नहीं है। जनपद की सिर्फ
पांच ग्राम पंचायतें ही इस में षामिल हैं जिनके किसानों को धान की फसल पर भी बीमा मिलेगा। यह जानते हुए भी कि जनपद में धान की फसल केसीसी बीमा में षामिल नहीं है अधिकारी किसानों को साफ नहीं बता रहे हैं। विधायक ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि अधिकारी जो आष्वासन दे रहे हैं उनकी हकीकत क्या है, विधायक नेतागीरी कर लौट गये और अधिकारी आष्वासन देकर, लेकिन किसानों को हकीकत से रूबरू करने की जरूरत किसी ने नहीं समझी।
वर्जन
एक कमेटी का गठन किया है जो सात दिन में नुकसान का आंकलन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद किसानां के नुकसान के हिसाब से मुआवजा दिलाये जाने की प्रक्रिया षुरू होगी। किसानों खराब हुई फसल
के नमूने लेकर आये थे, उन्हें आष्वस्त किया गया है।
सर्वज्ञराम मिश्र, जिलाधिकारी मथुरा
किसानों का बडा नुकसान हुआ है। किसानों को मुआवजे की जरूरत है। यह किसानों की सरकार है और किसानों के साथ है। किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्यवाही षुरू हो गई है। जिलाधिकारी से एक कमेटी का गठन किया है, जो सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
कारिंदा सिंह, विधायक गोवर्धन विधान सभा क्षेत्र
अब ग्राम पंचायत स्तर पर होता है निर्धारण
अब किस फसल पर मुआवजा दिया जना है यह ग्राम पंचायत स्तर पर निर्धारित होता है। अभी तक यह तहसील स्तर पर था। लेकिन बीमा कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों की राय जाने बिना ही अधिकारी कंपनी के मुताबिक फसलें तय कर देते हैं, जिससे कंपनी को कम से कम मुआवजा देना पडे।
किसानों को नहीं दी जाती रषीद
केसीसी लोन लेते समय बीमा की रकम बैंक अपने आप काट लेती है और पैसा बीमा कंपनी के खाते में चला जाता है लेकिन इस की कोई रषीद किसान को नहीं दी जाती है।
मिश्र।













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