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जनपद में धान की रोपाई का औसत क्षेत्रफल

मथुरा। रासायनिक उर्वरक की कमी का हल्ला प्रदेशभर में मचा हुआ है। मथुरा जनपद भी इससे अछूता नहीं है। मथुरा जनपद में खाद की उलब्धता और मांग के बीच संतुलन बिगडा हुआ है। हालांकि अधिकारी इस बात से साफ इनकार कर रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि खाद की सप्लाई पर्याप्त मात्रा में हो रही है। जबकि किसानों का कहना है कि उन्हें खाद मिल नहीं रहा है।

खाद की उपलब्धता तो है लेकिन इसके लिए उन्हें 20 से 40 रूपये प्रति कट्टा अधिक चुकाने पड रहे हैं। जब इसकी पडताल की गई तो चैंकाने वाले कुछ तथ्य समाने आये। इस बार धान की फसल का रकवा और अश्चर्यजनकरूप से जनपद में बढा है।

मथुरा जनपद में खरीफ की बुवाई का औसत रकवा करीब एक लाख हैक्टेयर है। इसमें 55 हजार हैक्टेयर रकवा अकेले धान ने घेर लिया है। शेष में अधिकतम में बजार है। जबकि कुछ में चारे सहित दूसरी फसल हैं। बाजार का औसत रकवा जनपद में करीब 48 हजार हैक्टेयर रहता है, जो इस बार कुछ कम रहा है। बाजारा की फसल में उर्वरक की खपत धान के मुकाबले कम होती है।


  धान में खाद का उपयोग विगत वर्षों में लगातार बढा है। जिंक की मांग भी धान में अधिक रहती है। कुल मिला कर धान में उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग किसान अंधाधुंध कर रहे हैं। ऐसे में अधिकारिक तौर पर जितने खाद की जरूरत खरीफ सीजन में होती है उतनी सप्लाई हो रही है लेकिन धान का बढा हुआ रकवा और भादौं के महीने में हुई शानदार बरसात ने यकायक खेतों में रसायनिक उर्वरक की खपत बढा दी।

इसी से मांग और आपूर्ति के बीच बने असंुतलन का कुछ लोग लाभ उठा कर अधिक मूल्य पर खाद बेच रहे हैं। यही असंतुलन खाद की कमी के रूप में प्रचारित हो गया है। राजनीतिक और किसान संगठन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस समस्या को राजनीतिक रंग सा मिल गया है, हालांकि सरकारी सिस्टम कुछ सतर्कता और कार्रवाही के साथ इस समस्या को पैदा होने से रोक सकता था लेकिन ऐसा हुआ नहीं, खाद नहीं होने की एक बार चली चर्चा ने किसानों के शोषण का रास्ता खोल दिया। खाद की कमी का बहाना बना कर किसानों से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं।

 

42 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की है खरीफ सीजन में खपत


जनपद में औसतन लगभग एक लाख हैक्टेयर रकवा में खरीफ की फसल होती है। जिसमें 50 हजार 500 हैक्टेयर में धान और करीब 48 हजार हैक्टेयर में बजरा की बुवाई होती है। बुवाई का यह कुछ हजार हैक्टेयर घटता बढता रहता है। इसके हिसाब से जनपद में करीब 42 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की खपत का अनुमान रहता है। इसी के हिसाब से सरकार को डिमांड भेजी जाती है। इसमें भी 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 13 हजार मीट्रिक टन डीएपी, पौटाश, जिंक एसएसपी, न्यूट्रिएंट प्रोडक्ट आदि है।

 

22 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 13 हजार डीएपी जनपद को उलब्ध हो चुका है। जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। किसानों को मांग के अनुरूप पूरा उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। जहां से भी डिमांड आती है वहां भेजा जा रहा है।

रामतेज यादव, जिला कृषि अधिकारी
 
 

नारद संवाद

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