देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों ने गांव का राजनीतिक मिजाज जाहिर कर दिया है। भाजपा, रालोद और बसपा के लिए पंचायत चुनाव दमखम दिखाने का मौका था तो आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए राजनीतिक जमीन तलाशने का मौका लेकर आये थे।

पंचायत चुनाव बसपा के लिए उत्साह वर्धक रहे हैं। रालोद को भी ताकत मिली है। भाजपा सरकार में रहने के बाद भी उस स्तर का प्रदर्शन नहीं कर सकी जिसकी उम्मीद रही होगी। इसके इतर चुनाव दर चुनाव आम आदमी पार्टी प्रदेश भर के साथ मथुरा जनपद में जमीन तलाशती रही। वहीं हर चुनाव की तरह कांग्रेस जमीन खोती नजर आई।
सपा ने रालोद से गठबंधन करने की बजाय जनपद में अपना जनाधार मजबूत करने पर जोर दिया और हार जीत से ज्यादा संगठन को मजबूत करने और पार्टी को बूथ स्तर तक ले जाने की योजना पर काम किया। आम आदमी पार्टी ने करीब एक दर्जन सीटों पर समर्थित उम्मीदवार उतारे थे। पंचायत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आम आदमी पार्टी ने इस बात पर जोर देना शुरू कर दिया था कि जनपद में पार्टी अधिक से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।

जिला पंचायत सदस्य ही नहीं बीडीसी और ग्राम प्रधान तक आम चुनाव मैदान में अधिक से अधिक उतारना चाहती थी। सपा की रणनीति भी यही रही। रालोद से गठबंधन कर कुछ एक सीट जीतने का मोह छोड कर सपा ने जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के हर स्तर पर अपने अधिक से अधिक उम्मीदवार उतारने का मौका बनाया।
पार्टी नेताओं का मानना है कि बूथ स्तर तक संगठन को खडा करने का चुनाव से बेहतर कोई और मौका नहीं हो सकता है। इसमें भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सबसे शानदार अनुभव देता है। जिला पंचायत सदस्य से लेकर ग्राम पंचायत सदस्य तक चुनाव मैदान मंे उतार कर पार्टी अपना जनाधार मजबूत कर सकती है। जो पार्टी अपने पैर जमा रही हैं उनके लिए यह शानदार मौका हो सकता है।
आम आमदी पार्टी के जिला सचिव सुरेश सैनी का मानना है कि गांव गांव और गली गली तक पार्टी को ले जाने का इससे अच्छा अवसर नहीं हो सकता। आम आदमी पार्टी ने इस अवसर को अधिक से अधिक भुनाने का प्रयास किया है। हार जीत से ज्यादा पार्टी का ढांचा खडा करना महत्वपूर्ण होता है। सपा जिलाध्यक्ष लोकमणिकांत जादौन का कहना है कि सपा लगातार जनपद में मजबूत हो रही है। पार्टी कार्यकर्ता चुनाव लडने के लिए मेहनत करते हैं। हमने अपने दम पर चुनाव लडा है। अपने कार्यकर्ताओं को मौका दिया है।













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