देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पहली बार अर्थव्यवस्था में सुस्ती की बात स्वीकार की, लेकिन उन्होंने आलोचकों से कहा कि वे नकारात्मकता न फैलाएं और साथ ही उन्होंने अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने का वादा किया। मोदी ने कहा, पिछले तीन सालों में 7.5 प्रतिशत विकास दर के बाद गिरावट आई है। मैं इससे इंकार नहीं कर रहा। सरकार अर्थव्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। हम निर्णय लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, हमने कई सारे कदम उठाए हैं। वित्तीय स्थिरता बनाए रखी जाएगी। हम निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। मोदी इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेकेट्ररीज के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
पीएम मोदी ने विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि कई वर्षों से लटका जीएसटी लागू किया और नोटबंदी लागू करने की हिम्मत भी हमारी सरकार ने ही दिखाई। पीएम मोदी ने कहा, पिछली सरकार में 8 बार ऐसे मौके आए जब विकास दर 5.7 या उससे नीचे गिरी थी। देश की अर्थ व्यवस्था ने ऐसी तिमाही भी देखी है, जब विकास दर 0.2 फीसदी, 1.5 फीसदी तक गिरी थी। ऐसी गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए और ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि उस वक्त भारत संकट की घड़ी में था। 2014 के पहले 2 साल 2012-13, 13-14 देखें तो औसत वृद्धि 6 फीसदी के आसपास थी।
कुछ लोग ये कह सकते हैं कि आपने दो ही साल क्यों लिए? दो साल का संदर्भ मैंने इसलिए लिया क्योंकि इस सरकार के 3 साल और पिछली सरकार के आखिरी के 2 सालों में जीडीपी का डाटा तय करने का तरीका एक रहा है। अब तुलना स्वाभाविक और सरल होती है। ष्टस्ह्र ने इस सरकार के दौरान 7.4 वृद्धि का डाटा दिया तो इन्हीं लोगों ने डाटा खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राउंड रियालिटी में ऐसा नहीं लग रहा है। हमारी जो शल्य वृत्ति है, उसमें ये फिट नहीं हो रहा है। 5.6 हुआ तो इसी इंस्टीट्यूट को अच्छा कहने लगे।
सरकार बनते ही एसआईटी गठित
मोदी ने कहा कि हमारी सरकार बनते ही एसआईटी बनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने कई साल पहले इसके लिए कहा था और हमारी सरकार ने पहली ही कैबिनेट में ये काम कर दिया। विदेश में जमा कालेधन के लिए कठोर कानून बनाए गए, नए देशों के साथ टैक्स ट्रीटी की गई और पुराने समझौतों में बदलाव किया गया। बैंकरप्सी कोड बनाए गए। 28 साल से अटका हुआ बेनामी संपत्ति कानून लागू किया गया। कई सालों से लटका हुआ जीएसटी लागू किया गया। डिमोनेटाइजेशन का फैसला लेने की हिम्मत भी इसी सरकार ने की।
सरकार ने देश में संस्थागत ईमानदारी को मजबूत करने के लिए काम किया है। ये सरकार के अथक परिश्रम का नतीजा है कि देश की अर्थव्यवस्था कम कैश में चल रही है। कैश टू जीडीपी रेशिओ 9 फीसदी हो गया है। 8 नवंबर इतिहास में भ्रष्टाचार मुक्ति के अभियान का प्रारंभ दिवस माना जाएगा। इस तारीख से पहले ये रेशियो 12 फीसदी था। अगर देश की अर्थव्यवस्था में ईमानदारी का नया दौर शुरू नहीं हुआ होता तो क्या ये संभव था? आपसे अच्छा ये कौन जानता है कि पहले कितनी आसानी से ब्लैकमनी का लेन-देन होता था। अब ऐसा करने में 50 बार सोचना होता है।
इकोनॉमी की आलोचना करने वालों पर कसा तंज
इकोनॉमी की आलोचना करने वाले लोगों पर एक और तंज कसते हुए मोदी ने कहा, शल्य महाभारत में थे। ये कर्ण के सारथी थे। ये हतोत्साहित करने का काम ही करते थे। शल्य इंसान नहीं ये एक वृत्ति है, जो महाभारत ही नहीं, आज के युग में भी है। जब डोकलाम हुआ तो लोग यही बोले। लोग बोले कुछ नहीं कर सकते हैं। कुछ लोगों को निराशा फैलाने में आनंद आता है, ऐसा करके वे रात को अच्छी नींद सोते हैं। ऐसे लोगों के लिए आजकल एक क्वॉर्टर की ग्रोथ कम होना, जैसे सबसे बड़ा ख्वाब पूरा हो गया है। इन लोगों को पहचाने की जरूरत है। जब डाटा अनुकूल होता है तो इंस्टीट्यूट भी अच्छे लगते हैं और प्रॉसेस भी सही लगता है। उनकी उम्मीदों के खिलाफ डाटा जाते ही संस्थान और वहां के लोग भी खराब लगने लगते हैं। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले ऐसे लोगों को पहचानना जरूरी है। शल्य वृत्ति को जब तक नहीं पहचानेंगे, तब तक सच के रास्ते में मुश्किलें आएंगी। क्या आपको लगता है कि देश में जीडीपी की ग्रोथ किसी तिमाही में 5.7 फीसदी तक पहुंची है।
मोदी बोले-मैं अर्थशास्त्री नहीं
मोदी ने कहा, इन चंद लोगों ने प्रचार शुरू कर दिया कि जीडीपी तय करने के तरीके में ही गड़बड़ है। तब डाटा के आधार पर नहीं फीलिंग के आधार पर बात कर रहे थे। साथियों, जैसे ही पिछली दो तिमाही में दर कम हुई तो उन्हें अच्छा लगने लगा कि कुछ हमारे मन का हो रहा है। मैं ना कोई अर्थशास्त्री हूं ना ऐसा ही कभी दावा किया है। लेकिन आज फ्लैशबैक में ले जाना चाहता हूं।
जीएसटी की कमियां दूर करेंगे
जीएसटी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, जीएसटी को तीन महीने हुए, हमने बारीक से बारीक चीजों का फीडबैक लिया है। हमने जीएसटी काउंसिल से कहा कि जो कठिनाइयां हैं व्यापारियों को उनका रिव्यू करें। सभी पार्टियां और सभी राज्य सरकारें मिलकर इसके बदलाव पर बात करें और उसे करें। मैं व्यापारियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हम लकीर के फकीर नहीं है और ना ही ये दावा करते हैं कि सारा ज्ञान हमें ही है। नई दिशा में जाना हमारी मंशा है, तीन महीने के भीतर जो भी बदलाव करने होंगे, उनके लिए सरकार साथ है।
मोदी ने कहा, 49 वर्ष की यात्रा में जिसने योगदान दिया उनका अभिनंदन। आज मुझे खुशी है कि विशिष्ट प्रकार के विद्वानों के बीच में आया हूं, जो इस बात के लिए जिम्मेदार हैं कि देश में हर कंपनी कानून का पालन करे, गड़बड़ी ना करे, पारदर्शिता रखे। आप अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाते हैं, उसी से देश का कॉरपोरेट कल्चर कैसा होगा, ये तय होता है। आपकी संस्था का मोटो है सत्य बोलो और नियम-कानून का पालन करो। आपकी दी हुई सही या गलत सलाह देश की कॉरपोरेट गवर्नेंस को प्रभावित करके रहती है। कई बार ऐसा होता है कि शिक्षा एक दी गई हो, लेकिन ग्रहण करने वालों का आचरण भिन्न भिन्न हो। जैसे एक ही शिक्षा युधिष्ठिर ने भी ली थी और दुर्योधन ने भी ली। लेकिन, दोनों का बर्ताव एकदम अलग था।
महाभारत का उदाहरण देते हुए पीएम ने कहा महाभारत में दुर्योधन ने कहा कि ऐसा नहीं है कि मुझे धर्म और अधर्म को नहीं जानता, लेकिन धर्म पर चलना मेरी प्रवृत्ति नहीं बन पाई और अधर्म को छोड़ नहीं पाया। ऐसे ही आप लोगों को सही दिशा में ले जाने की राह दिखाते हैं। देश में पारदर्शिता और ईमानदारी को संस्थागत करने में आपके संस्थान की बड़ी भूमिका है। आचार्य चाणक्य ने कहा है- जैसे पूरे वन में अगर एक ही वृक्ष में आग लग जाए तो पूरा वन जल जाता है। परिवार में कोई एक गड़बड़ हो जाए तो पूरे परिवार की मर्यादा धूल में मिट जाती है। ये बात संस्था और देश के लिए भी शत-प्रतिशत लागू होती है। देश में मु_ीभर लोग ऐसे हैं जो प्रतिष्ठा और ईमानदार सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम करते हैं। इन लोगों को हटाने के लिए सरकार ने पहले ही दिन से स्वच्छता अभियान शुरू किया हुआ है।
साभार-khaskhabar.com













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