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चित्तौडग़ढ़ (सलमान मंसूरी)। रात-रात भर जागकर परीक्षा की तैयारियों में जुटने के बजाय बच्चों से 500 रुपए की रिश्वत मांगकर परीक्षा में अच्छे अंक देने के ख्वाब दिखाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यह खिलवाड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा देने वाले शिक्षक स्वयं कर रहे हैं। अगर शिक्षक ही रिश्वत की मांग करे तो बच्चों को क्या शिक्षा मिलेगी? यह तय है कि रिश्वत नहीं देने पर बच्चों को इसका खमियाजा भी उठाना पड़ सकता है। यह सब कुछ हुआ है माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षा में। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ऐसे परीक्षक का इंतजाम किया है, जो अच्छे अंक देने के नाम पर बच्चों से रिश्वत मांग रहा है।
स्कूलों में बच्चों से ली जाने वाली परीक्षा एक पद्धति के अनुसार होती है। अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग प्रकार की परीक्षाएं भी होती हैं और प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षक भेजा जाता है, लेकिन यदि वही परीक्षक प्रत्येक छात्र से उन्हें अच्छे नंबर देने के लिए रुपयों की मांग करे तो ऐसे में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के क्या हालात होंगे। एक ओर प्रदेश के शिक्षा मंत्री शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन उनके दावे सिर्फ छात्र-छात्राओं की वेशभूषा बदलने से आगे नहीं बढ़ पाए।
यह है मामला
मामला चित्तौडग़ढ़ जिले के कांकरवा उच्च माध्यमिक विद्यालय का है, जहां 5 फरवरी को भूगोल की परीक्षा लेने आए एक परीक्षक ने छात्र-छात्राओं को पास करने की एवज में स्कूल के प्रिंसिपल से रुपयों की मांग की। इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर मार्गदर्शन भी मांगा है कि आखिर छात्रों के भविष्य के साथ होने वाले खिलवाड़ के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाएं।
जिले के भूपालसागर पंचायत समिति क्षेत्र के गांव कांकरवा के मोडसिंह चौहान राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भूगोल विषय के 12वीं कक्षा के छात्रों की प्रायोगिक परीक्षा थी। विद्यालय में 27 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा नियुक्त पीपलखेड़ा दौसा से आए परीक्षक विजय कुमार परैवा ने उनकी प्रायोगिक परीक्षाएं लीं। परीक्षक ने 4 घंटे की परीक्षा को ढाई घंटे में ही खत्म कर दिया और विद्यालय के प्रधानाचार्य से जाते समय प्रति बच्चे 500 रुपए की मांग की और अच्छे अंक देने की एवज में कहा कि वह उन्हें ये राशि बैंक के खाते में भिजवा दे। हद तो यह हुई कि परीक्षक के यहां से चले जाने के बाद उनके कथित असिस्टेंट का फोन आया और बाकायदा उन्होंने खाता नंबर देकर रुपए जमा कराने और इस एवज में बच्चों को 30 में से 29 नंबर तक देने का वादा किया।
इस पूरे मामले को विद्यालय के प्रधानाचार्य ताज मोहम्मद ने अपने फोन से रिकॉर्ड किया। रिकॉर्डिंग के दौरान कई बार परीक्षक और उनके कथित असिस्टेंट द्वारा गिफ्ट और रुपए देने की मांग की गई है। प्रति बच्चे 500 रुपए के हिसाब से मोलभाव किए जाने के बाद मामला 10 हजार रुपए में तय हुआ।
इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर पूरे वाकिये की जानकारी दी। पत्र में कहा कि 27 विद्यार्थियों की परीक्षा ढाई घंटे में पूरी कर दी गई और प्रति बच्चे के 500 रुपए के हिसाब से मांग की गई। पत्र में दावा किया गया है कि अच्छे अंक देने के बदले में उनके असिस्टेंट ने खाता नंबर भी दिया, जिसमें रुपए डालने के लिए कहा गया है।
ये हुई बातचीत
बच्चों को प्रायोगिक परीक्षा में नंबर देने के एवज में मांगे गए रुपए के मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य के पास परीक्षक और उसके कथित असिस्टेंट की पांच ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं। इसमें साफ तौर पर बच्चों को पास करने के लिए रुपए मांगे जा रहे हैं। मुख्य परीक्षक विजय कुमार परैवा के साथ बख्तावर सिंह नाम का व्यक्ति भी आया था, जो कथित रूप से अपने आप को उनका असिस्टेंट बता रहा था, उसी ने विद्यालय के प्रधानाचार्य ताज मोहम्मद को 8949057300 नंबर से फोन किया और पंकज शर्मा नाम के व्यक्ति का एसबीबीजे शाखा टोडाभीम का अकाउंट नंबर 61031349337 और आईएफएससी कोड देते हुए कहा कि इस अकाउंट में 10 हजार रुपए डलवा दें, ताकि बच्चों के नंबर की सूची व्हाट्स-एप पर भिजवा दी जाए। अब विद्यालय के प्रधानाचार्य बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है और उनका कहना है कि परीक्षाएं फिर से ली जानी चाहिए।
विभागीय कार्रवाई के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को भेजेंगे पत्र
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को पत्र लिखकर परीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्रकरण दर्ज कराया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो।
- राधेश्याम शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी
साभार-khaskhabar.com













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