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38 साल, 600 फिल्में, तब जाकर मिला ‘कटप्पा’, लिखा इतिहास

38 साल, 600 फिल्में, तब जाकर मिला ‘कटप्पा’, लिखा इतिहासदो सप्ताह बाद भारत की 6500 स्क्रीन्स के साथ-साथ विदेशों के 1000 स्क्रीन्स पर भारतीय सिने इतिहास की सबसे बडी और बहुप्रतीक्षित फिल्म बाहुबली-2 का प्रदर्शन होने जा रहा है। इस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। इंतजार इस बात का नहीं है कि फिल्म देखनी है इंतजार इस बात का है कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा इसका जवाब मिलेगा। आज दर्शकों की नजरों में कटप्पा हीरो हो गया है। वह सहनायक या खलनायक नहीं है बल्कि वो फिल्म के चर्चित पात्र ‘बाहुबली’ से ज्यादा जाना और पहचाना जा रहा है। कटप्पा के रूप में नजर आने वाला यह अभिनेता है सत्यराज, जिसे हिन्दी भाषी दर्शकों ने शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में देखा था। चेन्नई एक्सप्रेस में सत्यराज ने दीपिका पादुकोण के पिता की भूमिका निभाई थी। लेकिन उन्हें भारतीय सिने दर्शकों अर्थात् पूरे भारत में पहचान ‘कटप्पा’ ने दिलाई। पिछले 38 सालों में 600 फिल्मों में काम कर चुका यह अभिनेता 62 वर्ष की आयु का हो चुका है। 1978 में बतौर खलनायक फिल्मों में आने वाले इस अभिनेता ने दक्षिणी फिल्मों में हर प्रकार की भूमिका अभिनीत की हैं। आज पूरा भारत उन्हें सिर्फ ‘कटप्पा’ के नाम से जानता है। अपनी जिन्दगी के 38 वर्ष फिल्म उद्योग को देने वाले सत्यराज को अब 62 वर्ष की उम्र में जाकर एक ऐसी पहचान मिली है जिसके लिए एक कलाकार बरसों इंतजार करता है। एक कलाकार के जीवन में एक बार जरूर ऐसा किरदार आता है जो उसे इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाने का मौका देता है और अभिनेता सत्यराज के लिए ‘कटप्पा’ यह सुनहरा मौका लाया है। इस किरदार को दर्शक कभी नहीं भूल पाएंगे। जब कभी सिनेमा का इतिहास लिखा जाएगा उसमें ‘कटप्पा’ का विशेष उल्लेख होगा। यह किरदार उतना ही प्रसिद्ध है जितना कभी शोले का गब्बर सिंह, मिस्टर इंडिया का मोगैंबो, शान का शाकाल, अग्निपथ का विजय दीनानाथ चौहान, मुगल-ए-आजम का अकबर, चंगेज खां का चंगेज प्रसिद्ध हुए हैं।  

साभार-khaskhabar.com

 

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