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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे (डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज) रेल और सडक़ मार्ग वाले बोगीबील पुल का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस 4.9 किलोमीटर लंबे ब्रिज बोगीबील का 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर उद्घाटन किया। बोगीबील पुल के उद्घाटन के मौके पर निमंत्रित नहीं किए जाने पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने दु:ख जाहिर किया है।
बता दे, देश के इस सबसे लंबे पुल की नींव देवेगौड़ा ने ही रखी थी। बोगीबील पुल को कुल 5900 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर देश का सबसे लंबा डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज का 25 दिसंबर को उद्घाटन किया था। इस मौके पर यूं तो कई नामचीन हस्तियां शामिल हुईं लेकिन इस खास अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा को नहीं बुलाया गया जिसे लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी जताई है।
पूर्व प्रधानमंत्री एवं जद (एस) प्रमुख एच डी देवगौड़ा ने मंगलवार को असम में देश के सबसे लंबे रेल सडक़ पुल के उद्घाटन कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। इस पुल का इंतजार असम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों को कई सालों से था।
उन्होंने कहा, ‘कश्मीर के लिए रेल लाइन, दिल्ली मेट्रो और बोगीबील रेल सडक़ पुल वैसी परियोजनाएं हैं जिन्हें मैंने (बतौर प्रधानमंत्री) मंजूरी दी थी। मैंने प्रत्येक परियोजना के लिए 100-100 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था और इनकी आधारशिला रखी थी। लोगों ने आज इसे भुला दिया है।’संवाददाताओं के सवाल के जवाब में उन्होंने ये बातें कहीं। संवाददाताओं ने उनसे जब पूछा कि खुद की शुरू की गई परियोजना के उद्घाटन के बारे में वह क्या सोचते हैं, इस पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने कई परियोजनाओं की मंजूरी दी। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें कार्यक्रम के लिए आमंत्रण मिला था, इस पर देवगौड़ा ने कहा, ‘अय्यो रामा! कौन मुझे याद करेगा? कुछ अखबारों ने शायद इसका जिक्र किया हो।’
परियोजना पूरी होने में बहुत अधिक देरी होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘यहां पर मैं सहमत नहीं हूं। मैंने हासन-मैसुरु परियोजना को 13 महीने में पूरा किया। मैंने दो पुलों का निर्माण कार्य समय पर पूरा किया। अनगवाड़ी पुल (घाटप्रभा पर पुल) और कृष्णा नदी पर बने पुल को आप जाकर देख सकते हैं।’
गौरतलब है कि बोगीबील ब्रिज भारतीय सेना के लिए खासा अहम है। करीब 4.94 किलोमीटर लंबा रेल और रोड ब्रिज अरुणाचल सीमा से सटे होने के कारण सामरिक दृष्टि से यह खासा अहम है। यह पुल देश के पूर्वोत्तर इलाके की जीवन रेखा होगा बोगीबील पुल असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच संपर्क की सुविधा प्रदान करेगा।
साभार-khaskhabar.com













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