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मथुरा। महानगर में बंदरों के आंतक पर अंकुश लगाने के मुद्दे पर नगर निगम और वन विभाग आमने-सामने आ गए हैं। वन विभाग ने जहां किसी भी तरह की एनओसी देने से पल्ला झाड़ लिया है, वहीं नगर निगम एनओसी के इंतजार में बंदर पकड़ने के करीब आधा दर्जन टैंडर दबाए बैठा है।
बंदरों के आतंक के चलते वार्ड-57 में एक और महिला की मौत होने के बाद भी न ही जिला प्रशासन ही चेता है और न ही वन विभाग और नगर निगम गंभीर हुआ है।
लोग रोजाना बंदरों के आंतक के शिकार हो रहे हैं, लेकिन महानगर में आज तक नगर निगम बंदरों को पकड़वाने या उन्हें छुड़वाने की एक भी योजना पर अमल नहीं कर सका है। इस मुद्दे पर वार्ड-57 के पार्षद और कैबिनेट सदस्य रामदास चतुर्वेदी ने निगम के अफसरों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने बताया कि नगर निगम की पहली कैबिनेट बैठक में ही उन्होंने बंदरों का आतंक का मुद्दा उठाया था। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अफसरों ने पत्र ही दबा दिया।
पार्षद ने बताया कि दो दिन पहले भी निगम की कैबिनेट बैठक में उन्होंने बंदरों का मुद्दा उठाया, लेकिन अफसर कुछ भी करने को तैयार ही नहीं है। अफसरों की नाकामी की खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। नगर निगम की तरफ से लापरवाही बरती जा रही है। अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं, जिससे जनता परेशान है।
कोसी-फरह में अभियान शुरू
बंदर पकड़ने के मुद्दे पर वन विभाग व नगर निगम के बीच चल रही खींचतान किसी के गले नहीं उतर रही। कोसीकलां नगर पालिका ने अपने स्तर से जहां बंदर पकड़ने का अभियान शुरू करा दिया है, वहीं फरह नगर पंचायत भी अपने स्तर से बंदर पकड़वा रही है। दोनों ही निकाय प्रमुखों का कहना है कि जनहानि की वजह बन रहे बंदरों को वे जंगलों में छुड़वा रहे हैं।
मेयर ने छाडा पल्ला
नगर निगम के मेयर डॉ. मुकेश आर्य बंधु को एक ओर बंदर पकड़ने के मुद्दे पर जहां धार्मिक भावनाओं के आहत होने का डर है, वहीं उनका कहना है कि वन विभाग की वजह से सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि वह विभागीय मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं। विभाग एनओसी देने को तैयार नहीं है। महिला की मौत दुखद है। वह वन विभाग को फिर पत्र लिखने जा रहे हैं, ताकि बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने का अभियान शुरू किया जा सके।
वन विभाग व तहसीलदार को कई पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन वन विभाग ने एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया। अगर विभाग को कोई दिक्कत नहीं है, तो उसे एनओसी दे देनी चाहिए। नगर निगम टैंडर प्रक्रिया शुरू कर चुका है। करीब आधा दर्जन टैंडर भी आ चुके हैं, जिन्हें वन विभाग की एनओसी के इंतजार में खोला नहीं जा सका है।
अजीत कुमार, संयुक्त नगर आयुक्त
बंदरों को पकड़ कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत की है। वन विभाग का इस मसले को कोई लेना देना नहीं है। पिछले दिनों बैठक में भी यह तय हुआ था कि नगर निगम अपने स्तर से बंदर पकड़वा कर जंगल में छुड़वा सकता है। इसके लिए वन विभाग जिम्मेदार नहीं है।
अरविंद कुमार, डीएफओ, मथुरा













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