देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा।परिजनों की डांट से क्षुब्ध 9 वर्ष के बालक ने घर छोड़ दिया। आरपीएफ ने सीसीटीवी कैमरे की मदद से उसकी पहचान कर उसे बड़े भाई को सौंप दिया। परिजनों की तलाश करने में चिराग सोसाइटी ने भी आरपीएफ की मदद की। सोमवार सुबह आरपीएफ के उपनिरीक्षक रमेशचंद सीसीटीवी कैमरों पर नजर रख रहे थे। इसी दौरान प्लेटफार्म संख्या एक पर कृष्णा जेड के सामने लगी कुर्सी पर करीब 9 वर्ष की उम्र का एक बच्चा अकेला बैठा दिखाई दिया। उपनिरीक्षक ने पहले तो इसे नजर अंदाज कर दिया। काफी देर बाद भी बच्चा अकेला उसी कुर्सी पर बैठा दिखाई दिया तो उनका माथा ठनका। उन्होंने इसकी जानकारी आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक सीबी प्रसाद को दी। प्रभारी निरीक्षक ने बच्चे को थाने बुलवाया और परिजनों के बारे में जानकारी की। बच्चे ने बताया कि वह मैनपुरी का रहने वाला है। प्रभारी निरीक्षक ने बच्चे को विश्वास में लेकर उससे पिता का मोबाइल नम्बर हासिल कर लिया। फोन पर बच्चे के पिता से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि डांट की वजह से वह कहीं चला गया है। प्रभारी निरीक्षक ने बच्चे के मिल जाने और सकुशल होने की जानकारी चिराग सोसाइटी के माध्यम से पिता को दी। शाम को बच्चे का बड़ा भाई सलमान आरपीएफ थाने पहुंचा। बच्चे को बड़े भाई के सुपुर्द कर दिया गया। आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जंक्शन रेलवे स्टेशन पर भटके हुए बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था चिराग सोसाइटी के सदस्यों ने इसमें काफी मदद की। बच्चे को परिजनों के पास पहुंचा दिया गया है।













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