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हिंदू स्वाभिमान यात्रा का संत-महंतों ने किया स्वागत

छटीकरा में चक्रपाणी महाराज एवं प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन का स्वागत करते आचार्य रामविलास चतुर्वेदी
 
वृन्दावन(जहीर आलम)। गाजियाबाद से आई हिन्दू स्वाभिमान यात्रा का छटीकरा पहुंचने पर जोशीला स्वागत किया गया। अखिल भारत हिंदू महासभा के तत्वावधान में रामभक्त एवं संत-महंतों भागवताचार्यों ने महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी एवं बाबर की छठी पीढ़ी के वंशज प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुस्सी व अन्य यात्रियों का माल्यार्पण एव स्मृति चिन्ह भेंटकर भव्य स्वागत किया।
स्वामी चक्रपाणी महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर से करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। अत्याचारी बावर के गलत कृत्य पर उनके वंशजों द्वारा माफी मांगने से निश्चित ही मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उच्चतम न्यायालय में चल रहे राम जन्मभूमि के मुकदमे में हिंदू महासभा भी एक पक्षकार है और न्यायालय से अनुरोध है कि बाबर के वंशजों द्वारा माफीनामा लिखने से अब यह झगड़ा समाप्त समझकर मंदिर निर्माण के लिए आदेश पारित किए जाएं। उन्हें प्रसन्नता है कि प्रिंस हबीबुद्दीन तुस्सी भगवान श्रीराम से माफी मांगने के लिए उनकी खड़ाऊं सिर पर रखकर अयोध्या जा रहे हैं।
प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुस्सी ने कहा कि मुगल शासन में कभी हिंदुओं पर अत्याचार नहीं हुआ, बादशाह अकबर शाहजहां ने हमेशा हिंदू संतों, फकीरों का सम्मान किया। उन्होंने प्रेम की नगरी वृंदावन में जीव-जंतुओं के शिकार करने पर हमेशा के लिए रोक लगाई थी। स्वयं बादशाह अकबर स्वामी हरिदास महाराज के दर्शन करने यहां आए थे। कहा कि उनके पूर्वज द्वारा भगवान श्रीराम के मंदिर को तोड़ा जाना निश्चित ही मुस्लिम धर्म के लिए एक कलंक था, लेकिन अब माफीनामा लिखने से मन का बोझ उतर गया है। उन्होने कहा कि व राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से जल्द मुलाकात कर राम मंदिर निर्माण शुरू कराने की मांग करेंगें। कहा कि मंदिर के नाम पर अब राजनीति और एक दूसरे को लड़ाना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आचार्य अतुलकृष्ण गोस्वामी ने कहा कि बाबर के वंशज द्वारा माफी मांगना हिंदू सनातन धर्म के लिए बड़ी प्रसन्नता और गौरव की बात है।
बिहारीलाल वशिष्ठ एवं रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि मोदी सरकार ने जिस प्रकार एससीएसटी एक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कानून बना सकती है तो भगवान श्रीराम मंदिर के लिए वह कानून क्यों नहीं बना सकती है। बाबर के वंशजों द्वारा माफी मांगने से स्पष्ट है कि मुस्लिम समुदाय का भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए कोई भी विरोध नहीं है।
इस अवसर पर महंत परमेश्वरदास महाराज, तमालकृष्ण दास, स्वामी धराचार्य, महंत रामदेव चतुर्वेदी, मदनबिहारी दास, सुदर्शनदास, किशोरीशरण देवाचार्य, महेश पांडे, भुवनेश शर्मा, पतालनाथ, कार्ष्णि नागेंद्रदत्त गौड़, प्रदीप गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, आचार्य बद्रीश, विपिन बापू, अशोक शास्त्री, अशोक व्यास, अच्युतकृष्ण पाराशर, अभिषेककृष्ण, गोकुलचंद्र गोस्वामी, संजय शर्मा, बालो पंडित, कृष्णचंद्र जैन, सुधीर शुक्ला, डा. गोपाल चतुर्वेदी, गोपाल सारस्वत, अशोक सारस्वत, कान्हा शर्मा, प्रकाशचंद्र त्रिपाठी, मुकेश गौतम, ओमप्रकाश शर्मा, दीनू चतुर्वेदी, प्रताप सिंह, भगवती प्रसाद शर्मा आदि उपस्थित थे।

नारद संवाद

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