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आमआदमी की थाली पर दिखने लगी महंगाई की मार

ढाबे पर रोटी परोसाता कर्मचारीमथुरा(सुनील शर्मा)। महंगाई की मार आम आदमी की थाली पर साफ नजन आने लगी है। यहां तक कि पैसे नहीं बढा कर होटल ढाबा संचालकों ने रोटी का साइज छोटा कर दिया है। 
निरंतर हो रही पेट्रोल-डीजल की वृद्धि का असर हर आम लोगों की थाली तक पहुंच गया है। दो वक्त की रोटी भी अब महंगाई की मार के आगे आधी-सी हो गई है। अधिकांश होटल-ढाबा संचालकों ने आटा महंगा होने का यही तोड़ निकाला है। वे पहले से काफी छोटी व हल्की रोटी दे रहे हैैं। और करें भी क्या? तीन महीने में ब्रांडेड आटा एक रुपये और सामान्य आटा डेढ़ रुपये प्रति किलो महंगा हो चुका है। ब्रांडेड आटे का 10 किलो का पैकेट सितंबर में 280 से 290 रुपये तक था। अब 10 से 15 रुपये बढ़ चुका है। चक्की का आटा सितंबर में 22 रुपये प्रति किलो था, अब 23.50 रुपये पहुंच चुका है। उत्पादन लागत का कहर फ्लोर मिल मालिक नहीं मानते कि उन्होंने आटे का मूल्य बढ़ाया है। वे इसे उत्पादन लागत बढना बताते हैैं। दलील देते हैैं कि गेहूं तो महंगा हुआ है, लेकिन इससे ज्यादा मार पड़ी है बिजली, मजदूरी और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढने से। ये लोग यह तर्क भी देते हैैं कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) ने फ्लोर मिल के लिए गेहूं का न्यूनतम रेट 1900 रुपये प्रति कुंतल रखा है। इसके लिए हर महीने टेंडर पड़ते हैैं। इसमें भी 25-50 रुपये प्रति कुंतल बढ़ोत्तरी हो जाती है।
 
रेट बढ़ाना मजबूरी
एक अक्टूबर से केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य भी बढ़ाकर 1925 कर दिया है। इसमें भी हर तिमाही 25 रुपये की बढ़ोत्तरी होगी। इससे महंगाई और बढ़ सकती है। वहीं, मंडी से मिलने वाला 1750 रुपये प्रति कुंतल वाला गेहूं मिलों तक पहुंचते-पहुंचते 2050 रुपये के भाव हो जा रहा है। इससे रेट बढ़ाना मजबूरी हो गया है। वहीं, कुछ लोग इसे डीलर का खेल मानते हैैं।
 
व्यापारी अजय अग्रवाल ने बताते हैं कि गेहूं महंगा होने की वजह से आटे के दाम नहीं बढ़ाए। यह बढ़ोत्तरी बिजली, मजदूरी, ट्रांसपोर्ट चार्ज आदि बढने के कारण हुई है। बाजार में पहले से ही प्राइस वार छिड़ा हुआ है।
 
ब्रांडेड आटे के दाम बढ़े
फुटकर दुकानदार गौसना निवासी जयगोपाल का कहना है कि बीते कुछ हफ्तों में आटा महंगा हो चुका है। ब्रांडेड व चक्की का आटा दोनों ही एक से डेढ़ रुपये प्रति किलो उछाल मार चुका है।
 
गेहूं-आटा का मंडी भाव
महीना,      गेहूं,     आटा
जुलाई,      1750,    220  
अगस्त,      1820,    225
सितंबर,      1850,    230
अक्टूबर,      1890,    235
 
(गेहूं प्रति कुंतल व आटा 10 किलो के पैकेट के भाव।
 

नारद संवाद

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