देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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वृन्दावन(जहीर आलम)। बदलते वक्त के साथ इंसानों के अंदर से मानवीय संवेदनाएं खत्म हो रही हैं। अब रिश्ते नाते पैसो और जायदात के आगे बेमानी साबित हो रहे हैं। नजर इस बात पर टिकी रहती है कि कब कोई अनहोनी हो और उसका फायदा उठाया जाये। सोमवार को प्रकाश में आये एक मामले को देखकर तो ऐसा ही लगता है। बताते चलेंकि की सोमवार को विद्यापीठ चौराहा के समीप एक नेत्रहीन महिला अपने दो बच्चों के साथ ठोकरें खाती दिखाई दी। दुकानदारों ने लावारिश अवस्था मे घूम रही महिला की सूचना समाज सेविका डॉ. लक्ष्मी गौतम को दी। जब महिला से उसकी हालत के बारे में पूछा तो उसका दर्द छलक पड़ा। रोते हुए बताया कि वह सुरीर के नगला लोहई की रहने वाली 32 वर्षीय प्रीति पत्नी स्व. रामवीर है।
समाज सेविका लक्ष्मी गौतम ने बताया कि डेढ़ वर्ष पूर्व पति की मौत के बाद लालच की पट्टी आंखों पर बांधे देवर व देवरानी ने अपनी नेत्रहीन भाबी व दो मासूम बच्चों को घर से बाहर निकाल दर दर की ठोकरें खाने को छोड़ दिया। पीड़ित महिला जन्म से नेत्रहीन नही थी बल्कि बेटी के जन्म के बाद इसने अपनी आंखें खोई थी। पीड़ित विधवा महिला अपने 6 वर्षीय पुत्र एवं 3 वर्षीय पुत्री के साथ वृन्दावन की सड़कों पर पिछले एक महीने से ठोकरें खा रही है। कनकधारा फाउंडेशन की अध्यक्ष डा.लक्ष्मी गौतम ने महिला की सूचना पुलिस को दी और पुलिस के सहयोग से महिला व उसके दोनों बच्चों को राधिका अपना घर के लिए रवाना किया।













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