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ई-मार्केट में किसान बेच सकेंगे अपनी उपज

2019 तक पूरे भारत की मांडी एक दूसरे से कनेक्ट हो जाएंगीमथुरा। किसानों को उनके उत्पादन के उचित मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने जनपद और ब्लॉक स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। अब ये प्रयास मूर्तिरूप लेने लगे हैं। केंद्र सरकार ने 25 हजार करोड़ के भारी भरकम बजट की इस मद में व्यवस्था की है। 

2019 तक ब्लॉक स्तर तक लैब स्थापित की जाएंगी, किसान यहां अपने बीज की जांच करा सकते हैं। इसके लिए पहले रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। यहां से किसान को एक सर्टिफिकेट मिल मिलेगा, इसके बाद किसान पूरे देश में कहीं भी अपना अनाज आॅन लाइन बेच सकता है। केंद्र सरकार ने एक पोर्टल जारी किया है, इस पोर्टल के माध्यम से सभी मंडियां आपस में जुड़ जाएंगी और हर जानकारी को साझा कर सकेंगी, पोर्टल के माध्यम से व्यापारी और किसान देश की किसी भी मंडी के भाव को जान सकेंगें। 2019 तक पूरे भारत की मांडी एक साथ कनेक्ट हो जाएंगी। भारत सरकार ने 25 हजार करोड़ के भारी भरकम बजट की इस मद में व्यवस्था की गई है। इस संबंध में मंडी समिति परिसर में किसान और व्यापारियों की बैठक हुई। बैठक में सचिव और मंडी कर्मचारियों ने किसानों को पोर्टल के बारे में जानकारी दी। 
मंडी सचिव सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर 19 लोगों का समूह बनेगा, जिसमें मंडी कर्मचारी, किसान और व्यापारी शामिल रहेंगे। इस समूह के आगे किसान अपनी किसी भी तरह की समस्या को रख सकेंगे। किसान ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से जिला उद्यान अधिकारी किसानों को टमाटर जैसी फसलों के रखरखाव की जानकारी देंगे जिससे ये फसलें जल्दी खराब न हो सकें। किसानों को इसके लिए संसाधन भी उलब्ध कराये जाएंगे। 
 
किसान व्यापारी के बीच होगा ई-एग्रीमेंट
मंडी सचिव ने बताया कि पोर्टल पर किसान और व्यापारी अपना रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर कराएंगे। फिर किसान और व्यापारी के बीच डिजिटल एग्रीमेंट होगा। एक बार एग्रीमेंट होने के बाद कोई इससे पीछे नहीं हट सकता। किसान के यहां से माल उठाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की भी व्यवस्था होगी। व्यापारी किसान के घर से अपने भाड़े पर खुद माल उठायेगा। बिकने के 24 घंटे बाद किसान को उसकी उपज की कीमत मल जाएगी। 
 
 

नारद संवाद

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