देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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वृन्दावन(जहीर आलम)। सड़को पर घूमते आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए भले ही नगर निगम प्रशासन लाख दावे भरे। लेकिन जमीनी हकीकत आप तस्वीरों में साफ देख सकते हैं। नगर के अधिकतर भीड़ भाड़ वाले क्षेत्र इन पशुओं की गिरफ्त में है। चाहे नगर का चुंगी चौराहा हो या बस स्टैंड या फिर किशोरपुरा इन सभी मार्गों पर आवारा पशुओं का आतंक है। मथुरा वृन्दावन मार्ग सहित सभी क्षेत्रों में यह आवारा पशु हादसों को न्योता दे रहे है। अगर बात करें विश्वविख्यात बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र की तो यहां सबसे ज्यादा आवारा पशुओं का आतंक है। जिस कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले तीर्थ यात्री चोटिल हो जाते है। गाय और सांड इस मार्ग पर इस कदर कब्जा किए हैं कि आप बिना डंडे के रास्ता निकल नहीं सकते। स्थानीय लोगों के अनुसार रास्ता निकलने वाले बच्चे एवं स्थानीय लोगों को आवारा पशुओं के बीच से गुजर ना कई बार भारी पड़ चुका है।
सड़को पर घूमते सांड कब आपस मे भिड़ जाये कुछ कहा नही जा सकता। वही रास्तो पर घूमते सूअरों को देखकर श्रद्धालु भी काफी असहज महसूस करते हैं। पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम के कार्यकाल में सूअरों के विरुद्ध चलाये अभियान बाद रास्तों पर सुअरो का दिखना बन्द हो गया था। लेकिन नगर निगम बनने के बाद एक बार फिर आवारा पशु व सूअर नगर में घूमते दिखाई दे रहे हैं ।
बाँके बिहारी मंदिर क्षेत्र के स्थानीय दुकानदार जितेंद्र कुमार गौतम उर्फ टीटू ने बताया कि नगर में बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र काफी भीड़ भाड़ वाला क्षेत्र है गाय ,सूअर एवं सांडों के कारण आए दिन राहगीरों व श्रद्धालुओं को काशी परेशानी का सामना करना पड़ता है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं आवारा पशुओं ने मार्ग पर अपना कब्जा जमाया हुआ है । इस मार्ग पर प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाता रहा है । लेकिन सबसे बड़ा अतिक्रमण इन आवारा पशुओं का है जिसके आगे पुलिस एवं विभिन्न समाज सेवी संस्थाएं नतमस्तक दिखाई देती है। अगर बात करें नगर निगम प्रशासन की तो नगर निगम पर शासनादेश एवं सरकार के आदेशों का जरा भी असर दिखाई नहीं दे रहा है।
आवारा पशुओं के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर कई बार शासनादेश जारी हो चुका है।
इसके बावजूद भी आवारा पशुओं का सड़कों पर घूमना बदस्तूर जारी है। इतना ही अक्षय पात्र में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़कों पर घूमती गायों को लेकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। साफ तौर पर कहा था कि सड़कों पर कचरा खाती गाय दिखनी नही चाहिए। लेकिन शायद नगर निगम व प्रशासन के लिए मुख्यमन्त्री के आदेश भी कोई मायने नही रखते। पंजाब से आई शिल्पा नामक महिला श्रद्धालुओं ने प्रशासन से आवारा गायों को गौशाला में पहुंचाने की बात कहकर राहगीरों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की सलाह दी। वहीं स्थानीय निवासी गिरीश गौतम ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि सड़कों पर आवारा पशु गाय बंदर आदि का कब्जा रहता है। जिससे आए दिन श्रद्धालु हंसी परेशान होते हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। सवाल उठता है कि शासनादेश व मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद सड़को पर घूमते पशुओ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही हो पायेगी या आवारा पशुओ के कारण सड़को पर लोग ऐसे ही हादसों का शिकार होते रहेंगे।













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