देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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वृन्दावन(जहीर आलम)। एससी/एसटी के विरोध एव विप्रो के अधिकारों को लेकर विप्र महा कुम्भ में ब्राह्मण समाज के लोग जमकर दहाड़े । एससी एसटी एक्ट पर सरकार के फैसले के खिलाफ विप्रो में खासा आक्रोश नजर आया। विप्रो में सरकार को एक्ट में बदलाव को दो महीने का समय दिया है। विप्रो ने विभिन्न मांगों को लेकर आठ सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। आज छटीकरा वृन्दावन मार्ग स्थित शांति सेवा धाम के सामने विशाल विप्र कुंभ का आयोजन किया गया। जिसमें कई प्रांतो के हजारो विप्रों ने सहभागिता कर अपनी ताकत दिखाई। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन से हटकर अलग कानून बनाने पर विप्रो ने कड़ी आपत्ति जताई। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने गौ हत्या पर पूर्ण पाबंदी नहीं लगाई ना ही कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की व्यवस्था की। नाही 370 पर कोई एक्शन लिया। लेकिन वोट बैंक की खातिर काला बनाया। वक्ताओं ने एससी एसटी एक्ट को लेकर सत्ता रूडी पार्टी सहित विपक्ष के सभी नेताओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। विप्रो ने एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के तरीके से लागू किये जाने की मांग की। विप्रो ने सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि जबसे ये सरकार आइ है तबसे ब्रह्मण का स्वाभिमान और सम्मान खतरे मे है। कहा कि अगर सरकार ने अपनी गलती नही सुधारी तो 2019 के चुनाव में सरकार को इसका परिणाम भुगतना होगा। सरकार मे बैठे लोग सिर्फ पांच साल के किराए दार है। विप्र महाकुम्भ में दलितों के सम्मान की भी खूब तरफदारी की गई । दलितों को अपना भाई बताकर उनका सम्मान करने की सीख भी दी गयी। वही ठाकुर देवकी नन्दन ने कहा की अब हम ब्रह्मणो को भी बदलना होगा की जब किसी गांव मे किसी छोटे भाई की बरात निकले तो उसे भी उसी सम्मान और भाई चारे से निकलने दें ...उन्होंने पक्ष विपक्ष के सभी सांसदों को इस एक्ट के लिए दोषी माना। कहा कि किसी सांसद ने विरोद क्यों नही किया। और क्यूँ आज तक राम मंदिर नही बना क्यूँ अभी तक धारा 370 नही हटी और आज क्यूँ सब बोल रहे है की एससी एसटी एक्ट को बनने दो। .चेतावनी दी.अगर एस सी एक्ट को दो महीने मे नही बदला और सुप्रीम कोर्ट की तरह ये कानून नही बना तो अगले बार जितने भी दोषी सांसद है वो जीत नही पाएंगे। वही सोनभद्र के आशीष मिश्रा ने इस एक्ट के विरोध में 6 सितम्बर को भारत बंद का एलान कर सभी से सहयोग मांगा।
1-विप्र समाज का कहना था कि एससी एसटी एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आधार के अनुसार लागू किया जाए .विप्र समाज ने 8 सूत्रीय मांगों को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर सरकार से अपील की कि वह
2-सवर्ण आयोग का गठन करें..
3- कश्मीरी ब्राह्मणों को पुनः स्थापित किया जाए .
4-श्री गीता ग्रंथ को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करके पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए.
5- सनातन धर्म के ग्रंथ एवं देवी-देवताओं की मूर्तियों का अपमान करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने एवं सख्त दंड विधान हो .इस पर ईशनिंदा की तर्ज पर कानून बने .
6-संपूर्ण भारतवर्ष के तीर्थ स्थलों मंदिरों में पंडा पुजारी एवं तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों का संरक्षण किया जाए .
7-भगवान श्री परशुराम की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए .
8-संपूर्ण चौरासी कोस को तीर्थ स्थल घोषित किया जाए..
इस अवसर देवकीनंदन ठाकुर, कार्ष्णि नागेन्द्र महाराज, महेश पाठक, बिहारीलाल वशिष्ठ, आचार्य बद्रीश, सौरभ गौड़, गोपेश गोस्वामी, तुलसी स्वामी, अतुल कृष्ण, श्रीकांत भौरे, रमण बिहारी गौतम, राजकुमार शर्मा, अशोक व्यास, रामविलास चतुर्वेदी, विपिन बाबू, अशोक शास्त्री, श्याम सुंदर गौतम, आर एस त्रिपाठी, विजय शर्मा, सुधीर शुक्ला, किशोर पचौरी, मदन मोहन पांडे सहित बड़ी संख्या में विप्रगण मौजूद रहे.













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