देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(सतपाल सिंह)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव समूृचे ब्रजमंडल में समूचे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव का साक्षी बनने के लिए पांच लाख से अधिक श्रद्धालु मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, गोवर्धन आदि पवित्र स्थलों पर डेरा डाले हुए हैं। भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण से पहले मां देवकी को कंस ने बहुत कष्ट दिये। भाई कंस ने कारागार में बंद कर दिया। बेड़ियों में जकड़े देवकी और वासुदेव ने ईश्वर से प्रार्थना की। माता देवकी और वासुदेव के कष्टों में सहभागी बनने के लिए ही श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने के लिए किसी भी प्रकार के कष्टों की परवाह नहीं करते है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जन्माष्टमी उत्सव की एक झलक पाने तमाम राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने रात से ही डेरा डाल लिया है।
केशव टीला पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान से कन्हैया के जयकारे लग रहे थे। मंदिर की सतरंगी आभा इलाके में फैली थी। जन्मभूमि को जाने वाली सड़क के डिवाइडर पर अब पैर रखने को जगह नहीं है। बांदा, हमीरपुर, झांसी, सागर, हरदोई, सुल्तानपुर और मध्यप्रदेश के तमाम जिलों से बसों और ट्रेनों से आए ये लोग अब दो दिन सड़क पर ही सोएंगे और यहीं भोजन बनाएंगे। भोजन की व्यवस्था नहीं होगी तो भंडारों का सहारा लेंगे। भाव सिर्फ इतना है कि रात 12 बजे जब पालनहार जन्म लें, वह उस घड़ी के गवाह बनें। समस्या नहीं सौभाग्य है ये।













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