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तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थी गोपीबाला मां

वृंदावन में गोपीबाला मां की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते साधु-संत। वृन्दावन(केके पाठक)। छटीकरा मार्ग स्थित कपिल कुटी सांख्य योग आश्रम में सोमवार को साध्वी गोपीबाला मां का तिरोभाव महोत्सव श्रद्धा-भाव के साथ मनाया गया। इस दौरान लोगों ने उनको श्रद्धांजलि देने के साथ उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। महामंडलेश्वर राधिका साधिका जटा वाली मां ने कहा कि गोपी मां परम सिद्ध परम भजनानंदी और धाम निष्ठा के प्रति अपार निष्ठावान थी। उन्होंने ब्रजवास कर संत सेवा, गो-सेवा आदि में अतुलनीय योगदान दिया। स्वामी आदित्यानंद ने कहा कि गोपीबाला मां त्याग, तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थी। उनका संपूर्ण जीवन पीडि़त मानवता की सेवार्थ रहा। इससे पूर्व आश्रम परिसर में गोपीबाला मां की प्रतिमा का माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही निर्धन व असहाय लोगों को खाद्य सामग्री व वस्त्रों का वितरण भी किया गया।  इस अवसर पर डा. गोपाल चतुर्वेदी, पं. बिहारीलाल वशिष्ठ, स्वामी ब्रह्मचैतन्य महाराज, सुरेश मुनि, रामजीवन दास, विशम्भर दास, स्वामी गीतानंद, अभीजीत ब्रह्मचारी, आरपी सक्सेना, पुरुषोत्तम गौतम, पवन गौतम उपस्थित रहे।

नारद संवाद

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