देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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माले। मालदीव में अगले महीने चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इससे पहले एक बार फिर भारत और मालदीव के बीच तनातनी देखी जा रही है। दरअसल, भारत-मालदीव संबंधों में तनाव के ये दौर में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक विवादास्पद ट्वीट के बाद सामने आया। बता दे, पिछले कई महीनों से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत के साथ मालदीव के संबंध भी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। स्वामी के ट्वीट के बाद मालदीव ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर अपनी ‘नाराजगी’ जताई।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव के विदेश सचिव अहमद सरीर ने स्वामी के ट्वीट के बाद भारतीय उच्चायुक्त अखिलेश मिश्रा को रविवार को तलब किया। मालदीव सरकार ने इसे लेकर एक ‘डेमार्श’ (कूटनीतिक कदम) भी सौंपा और स्वामी के ट्वीट पर हैरानी जताई। इससे पहले स्वामी ने ट्वीट कर कहा था कि अगर मालदीव में होने वाले आगामी चुनाव में ‘धांधली’ होती है तो भारत को इस द्वीप देश में ‘आक्रमण’ देना चाहिए।
स्वामी ने यह ट्वीट 24 अगस्त को किया था। बीजेपी नेता ने अपने ट्वीट के साथ मालदीव की एक न्यूज रिपोर्ट का लिंक भी शेयर किया था, जो कोलंबो में पिछले सप्ताह मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के साथ उनकी मुलाकात को लेकर थी। इससे पहले 22 अगस्त को भी स्वामी ने ट्वीट कर कहा था कि नशीद ने चुनाव में धांधली को लेकर आशंका जाहिर की है और भारत को अपने पड़ोस में ऐसा नहीं होने देना चाहिए।
हालांकि बाद में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने स्पष्ट किया था कि स्वामी के ट्वीट उनके निजी विचार हैं, यह भारत सरकार की राय नहीं है। माना जा रहा है कि भारतीय उच्चायुक्त अखिलेश मिश्रा ने भी रविवार को मालदीव से यही स्पष्ट किया।
साभार-khaskhabar.com













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