देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने लोकसभा में एससी-एसटी संशोधन बिल को पेश करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद डीएसपी रैंक के अधिकारी को तय करना है कि एफआईआर दर्ज होगी या नहीं। साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर भी एसएसपी की रैंक के अधिकारी की अनुमति लेनी होगी।
इस मामले में सरकारी कर्मचारी को भी गिरफ्तारी में काफी परेशानी आ रही थीं। अगर यह कानून उच्चतम न्यायालय के आधार पर चला तो पीडि़त को न्याय नहीं मिल सकेगा। अपराधी बैखोफ हो जाएंगे। इस अधिनियम में अब जोडा गया कि किसी भी अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता नहीं लेनी पडेगी।
गहलोत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय से यह कानून कमजोर हो गया था। इस कानून की मूल आत्मा खत्म हो गई थी। इस कानून की कोई जरूरत नही थी। इसलिए संशोधन बिल लाने की आवश्यकता पडी है।
सरकार ने कानून के महत्व बनाने के लिए धारा 18 में संशोधन की जरूरत महसूस की है और कैबिनेट से इस बिल को पारित कर दिया गया। उल्लेख है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद दलित संगठनों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। 2 अप्रेल को देशव्यापी प्रदर्शन भी किया गया था।
साभार-khaskhabar.com













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