देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(सतपाल सिंह)। गुरू पूर्णिमा का पावन पर्व मसानी स्थित गुरू विरजानंद आर्ष गुरूकुल वेद मंदिर में आर्य समाज द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती के गुरू विरजानंद की जयंती के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर गुरूकुल अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश महाराज द्वारा नवीन ब्रम्हचारियों के प्रवेश दीक्षा व उपनयन संस्कार कराया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज ही के दिन गुरुवर विरजानन्द ने महर्षि दयानन्द को आदेश दिया था कि देश में फैले अन्धकार को मिटाकर फिर से देश को विश्व का सिरमौर बना दो। उन्होंने कहा कि दुनिया का उपकार कोई कर सकता है तो वह केवल एक ब्रम्हचारी ही कर सकता है। सत्याचरण रुपी धर्म को अपनाकर अपने जीवन को देश धर्म को समर्पित करें तभी देश बचेगा। आचार्य श्री ने कहा कि आज देश में पाखंड व अंधविश्वास बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसको केवल आर्य समाज ही रोक सकता है। उन्होंने सभी आर्यजनों से बच्चों को संस्कारित करने का भी आह्वान कर संकल्प कराया। इससे पूर्व वैदिक विधि विधान से वेद मंत्रों के द्वारा यज्ञ सम्पन्न हुया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने आहूतियां दी। गुरूकुल के ब्रम्हचारियों द्वारा अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। इस मौके पर प्रमुख रूप से सत्यप्रिय आर्य प्रधान, तोरन चौधरी, विवेक प्रिय आर्य, कपिल प्रताप सिंह, योगेश आर्य, भानुप्रताप मलिक, संतोष आर्य, विनोद चौधरी, विपिन बिहारी आर्य, ब्रजकिशोर आर्य, भगत सिंह वर्मा, रामबिहारी आर्य, नबाब सिंह सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।













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