देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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गोवर्धन(पवन शर्मा)। आस्था के मिनी कुंभ मुड़िया पूर्णिमा मेला में अथाह जनसैलाब उमड़ रहा है। मुड़िया पूर्णिमा मेला शुरू होते ही लाखों श्रद्धालु गिरिराज जी की शरण में पहुंच रहे हैं। जयकारों के साथ श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। परिक्रमार्थियों को कंकड़-पत्थर की चुभन की कोई परवाह नहीं है। उमस भरी गर्मी भी श्रद्धालुओं को उत्साह को कम नहीं कर रही है। शाम ढलते ही भीड़ का सैलाब परिक्रमा मार्ग में उमड़ने लगा है। बस स्टैंड हो या रेलवे स्टैशन चहुंओर गिरिराज महाराज के जयकारों के बीच श्रद्धालु चले आ रहे हैं।
गिरिराज महाराज के मुड़िया मेला का नजारा किसी कुंभ से कम नहीं है। इस बार मेला के दो दिन पहले ही भीड़ का आवागमन शुरू हो गया। अनुमानतः अब तक तीन दिन में दस लाख श्रद्धालुओं की संख्या का आंकड़ा गोवर्धन महाराज की परिक्रमा कर चुका है। परिक्रमार्थी अपनी सुध-बुध खोये गिरिराज महाराज की परिक्रमा लगा रहे हैं। मंगलवार को तेज धूप व उमस के बाद हल्की बरसात ने मौसम को खुशनुमा कर दिया। मुड़िया मेला में जगह-जगह लगे सेवा शिविर व धार्मिक कार्यक्रम माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। मानसी गंगा के फुव्वारों में श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। यहां आने वाले परिक्रमार्थी गिरिराज जी का दुग्धाभिषेक व पूजन-अर्चन कर रहे हैं। आकर्षण का केन्द्र हैं मंदिर व सरोवर
गोवर्धन के दानघाटी मंदिर, मुकुट मुखारविंद मंदिर, हरिगोकुल मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, मानसी गंगा, आन्यौर के श्रीनाथ जी मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर, गोविंद कुंड, संकर्षण कुंड, पूंछरी में पूंछरी का लौठा, नवल कुंड, अप्सरा कुंड, श्रीनाथ जी मंदिर, जतीपुरा में मुखारविंद मंदिर, लुकु-लुक दाऊ जी मंदिर, इन्द्र पूजा स्थल, हरि जी कुंड, रूद्र कुंड राधाकुंड में राधारानी कृष्ण कुंड, कैला देवी मंदिर, कुसुम सरोवर, नारद कुंड आदि दर्शनीय है।













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