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कृषि ही नहीं पशुपालन भी बेहद जरूरीः शेखावत

सीआईआरजी के स्थापना दिवस समारोह तथा किसान मेले का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन करते केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत। साथ हैं गोवर्धन विधायक ठा.कारिन्दा सिंह, बलदेव विधायक पूरन प्रकाश एवं अन्य। मथुरा(सतपाल सिंह)। कृषि ही नहीं पशुपालन करने से किसानों की आय को बढ़ा सकते हैं। देश के किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृषि की उपज को बढऩा होगा। उक्त उद्गार केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सी.आई.आर.जी.) के 39वाँ स्थापना दिवस समारोह तथा किसान मेले के इस समारोह में केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि संस्थान ने देश के लोगों के जीवन में परिवर्तन किया है। मैं पश्चिमी राजस्थान से आता हूं और वहां का अकाल मेरा सहोदर है, लेकिन फिर भी वहां के किसान आत्महत्या नहीं करते हैं, क्योंकि किसान न केवल कृषि कर रहे है बल्कि वह पशुपालन कर अच्छी आमदनी  प्राप्त कर रहे है। उन्हें आत्महत्या का दंश नहीं झेलना पड़ता। हमारी सरकार पिछले 4 वर्षो से देश के अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया है। मृदा का उपजाउपन बढ़ाने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसान भाई-बहनों को उपलब्ध कराया है। 

अभी तक कृषि सिंचाई के लिए भूगर्भ जल का उपयोग 60 प्रतिशत होता है एवं 40 प्रतिशत नदियों द्वारा। 99 जल परियोजनाऐं जो दशकों से लम्बित थी उनकी शुरूआत करायी गई है, जिससे सिंचाई के लिए 20 लाख हेक्टेअर जमीन पर सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो सके। खाद्यान के मामले में देश 10 निर्यातक देशों में पहला है। सबसे ज्यादा खाद्यान हमारे देश में पैदा होता है, जिसमें गेहूं, बाजरा, ज्वार, चावल प्रमुख है। लागत का डेढ़ गुना मूल्य सरकार ने किसानों के लिए किया है

उन्होंने आगे कहा कि जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा तब तक देश खुशहाल नहीं होगा। आने वाले समय में गोल्ड रिवाल्यूशन जिसमें शहद के उत्पादन को बढ़ाना तथा ब्यू रिवाल्यूशन मछली को उत्पादन को बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है। 

अनुसंधान कार्यो में लगे संस्थानों का प्रयोगशाला में किये प्रयोग किसानों तक त्वरित गति से पहुंचने चाहिए तभी अनुसंधान का लाभ होगा। 

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कार्यक्रम में आये अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्जलित कर सरस्वती वन्दना से प्रारम्भ किया। 

संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि बकरियों को बीमारियों से बचाने के लिए संस्थान द्वारा कलैण्डर विकसित किया गया है, जिससे बकरियों की मृत्यु दर जो पहले 40 प्रतिशत तक थी वह 15 प्रतिशत पर आ गई है। 

बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का हस्तान्तरण किया गया है। डॉ. अशोक कुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं टीम द्वारा विकसित की गई तीन हर्बल औषधियों का व्यवसायिक रूप तकनीकी हस्तान्तरण मंत्री द्वारा कराया गया,  जिसमें मुख्य हर्बल औषधि हैल्मोकेयर, आई.एम.यू. फोन है जो कि ग्याभित बकरी को देने से उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है तथा दुध की गुणवत्ता का स्तर भी बढ़ जाता है।  गोवधन क्षेत्र के विधायक कारिन्दा सिंह ने कहा कि खेती को उद्योग के रूप में बदलने की जरूरत है। इस क्षेत्र का भूगर्भ जल खारी है। इसलिए इस प्रकार के बीजों पर अनुसंधान होने की जरूरत है जो खारी पानी में भी अच्छी पैदावार दे सके। बलदेव विधायक पूरन प्रकाश ने कहा कि किसानों को कम लागत में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सके। इसके साथ केन्द्रीय मंत्री से मांग कि जो किसान बकरी पालन की ट्रेनिंग लेने आते है उनके लिए आवास की व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान यहां आकर लाभान्वित हो सके। 

किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष महिपाल सिंह ने कहा कि किसानों के लिए ये शुभ अवसर है। प्रधानमंत्री जी ने किसानों के लिए अच्छी सोच के साथ कार्य किया है। दीनदयाल संस्थान के निदेशक राजेन्द्र सिंह ने कहा कि पं.दीनदयाल किसान कैसे खुशहाल बने, अत्योत्य का विकास, गरीबी उन्मूलन पर सरकार समर्पित है।

इसके साथ 11 उन्न्तशील बकरी किसान पालनों को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया, जिसमें धौलपुर के विवेक जादौन, राधेश्याम राणा, रमेश कुमार, प्रशान्त कुमार, राशिद मोहम्मद, नईम कुरैशी, यशपाल नेगी, भूदेवी, अभिषेक सिंह प्रमुख है। इसके अलावा पांच गरीब किसानों को बीजू बकरा/बकरी भी संस्थान द्वारा प्रदान की गई। अन्त में डॉ. मनोज कुमार सिंह प्रधान वैज्ञानिक एवं मेले आयोजक द्वारा अतिथियों एंव मेले में आये हुए किसानों को धन्यवाद दिया। मंच संचालन जूही पाठक एवं डिम्पल अदानी ने किया। 

मेले में लगभग 600 किसान भाई-बहन विभिन्न राज्यों जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, मध्य प्रदेश, पंजाब एवं राजस्थान सम्मिलित है। इस मेले में वैज्ञानिक किसानों वैज्ञानिक तरीके से कैसे बकरी पालन करें तथा उनके पोषण, चारे एवं विभिन्न बकरी में विभिन्न प्रकार होने वाली बीमारियों की रोकथाम की जानकारी दी गई। इसमें देश के कई राज्यों के प्रगतिशील कृषक और पशुपालकों ने भाग दिया। 

इस अवसर पर सरसों अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद राय, डॉ. के.पी. सिंह, डॉ. ए.के. तोमर इत्यादि है। इसके साथ ही किसानों को मानसून केयर कीट उपलब्ध करायी गयी, जिसमें बकरी को बरसात से होने वाली बीमारियों की दवा, मिनरल मिक्चर एवं पठन सामग्री भी दी गई। 

नारद संवाद

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