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जयपुर के चित्रकूट इलाके निवासी एक चाय व्यापारी ने कर्जे से परेशान होकर नागौर की एक धर्मशाला में आत्महत्या कर ली। यह कदम उठाने से पहले उसने सुसाइड नोट लिखा। दो पेज का यह सुसाइड नोट बेटे शिवांत के नाम संबोधित था।
जयपुर के चित्रकूट निवासी चाय व्यापारी सुखपाल चंद महेता ने नागौर की धर्मशाला में जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को सूचना दी गई। बाद में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। व्यापारी सुखपाल जोधपुर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रसन्न चन्द महेता के छोटे भाई थे। पुलिस के अनुसार वे मंगलवार को धर्मशाला में रुके थे। बुधवार सुबह 11 बजे तक दरवाजा नहीं खोला तो मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी। सुखपाल का पर्स वहां पड़ा था और उसके मुंह से झाग आ रहे थे। पुलिस को सुखपाल के कमरे से उनके बेटे शिवांत के नाम दो पेज का सुसाइड नोट मिला है।
यह लिखा सुसाइड नोट मेंव्यापारी सुखपाल ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वर्ष 2001 में जयपुर ऑफिस जाॅइन किया तो 1.60 लाख रुपए माइनस में था। इसके बावजूद मेहनत करके 2012 तक मकान, गोदाम और दो ऑफिस खड़े किए थे। 2006 में बंटवारे में मेरे हिस्से में जयपुर की देनदारी और 97 लाख का कर्ज आया। काफी उतार भी दिया, लेकिन 10 लाख से बढ़कर ब्याज सालाना 30 लाख रुपए तक पहुंच गया। ब्याज के 3 करोड़ रुपए तक चुका दिए, लेकिन कर्जा बढ़ता गया। इस बीच चाय सप्लाई करने वाली कंपनी ने सप्लाई बंद कर दी। अब कर्जा चुकाने की मेरे में हिम्मत नहीं है। लेनदारों के दबाव में 8 मई 2018 को घर छोड़कर भागना पड़ा। तेरे कहने पर वापस आया, लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की। अब फिर भारी दबाव में हूं। घर छोड़कर मौत को गले लगाने का विचार आ गया और मैं निकल पड़ा हूं। मरने का उपाय ढूंढ़ रहा हूं।
साभार-khaskhabar.com













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