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जीवन को सुंदर बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है श्रीमद् भागवत कथा

श्रीकृष्ण-जन्मभूमि परिसर में पुरुषोत्तम मास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर कथाव्यास बालयोगी ब्रह्मानंद को उत्तरीय व श्रीकृष्ण प्रतिमा भेंट करते प्रबंध समिति के सदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डॉ.चन्द्रभानु गुप्त व जनसम्पर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह। मथुरा(के.के पाठक)श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीलामंच पर परम पवित्र अधिकमास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस बुधवार को कथा का विस्तार से व्याख्यान करते हुए पूज्य काष्र्णि बालयोगी संत ब्रह्मानंद महाराज ने कहा कि जीव मानव योनि में जन्म लेता है तो उसकी मृत्यु भी साथ में जन्म लेती है, परन्तु व्यक्ति की मृत्यु सुंदर हो वह सद्गति प्राप्त करे। व्यक्ति की मृत्यु तभी सुंदर होगी जब उसका जीवन सुंदर होगा और जीवन को सुंदर बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है श्रीमद्भागवत कथा। 

श्रीमद्भागवत क्रम को आगे बढ़ाते हुए कथा रस प्रवाहक काष्र्णि बालयोगी संत ब्रह्मानंद महाराज ने प्यारे प्रभु श्री द्वारिकाधीश की गृहस्थलीला का सविस्तार वर्णन करते हुए कहा कि मानव को अपनी दिनचर्या कैसे व्यतीत करनी चाहिए यह शिक्षा हमें प्रभु द्वारिकाधीशजी की गृहस्थ जीवन से मिलती है। प्रभु श्रीकृष्ण सूर्योदय से पूर्व उठकर अपने माता-पिता को वंदन करते थे। ऐसा करने से आयु, विद्या, यश और बल बढ़ता है। 

सुदामा चरित्र प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए महाराजजी ने कहा कि सुदामाजी गरीब थे, परन्तु दरिद्र नहीं थे। परमात्मा श्री द्वारिकाधीश के मित्र सुदामा के पास प्रभुनाम रुपी धन था, लौकिक धन तो इस  लोक में ही साथ देगा परन्तु प्रभुनाम रुपी धन इहलोक और परलोक दोनों जगह साथ देते हुए सुख और शांति प्रदान करता है। 

कथा आरंभ से पूर्व यजमान साध्वी आशा, योगेश अग्रवाल, जगदीश खंडेलवाल ने श्रीमद्भागवत कथा वक्ता काष्र्णि बालयोगी ब्रह्मानंद महाराज का स्वागत कर श्रीमद्भागवत का पूजन कर माल्यार्पण किया। संस्थान सदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डा. चन्द्रभान गुप्ता द्वारा उत्तरीय ओढ़ाकर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य काष्र्णि बालयोगी ब्रह्मानंद महाराज को भेंट की गई। कथा विश्राम के साथ आरती में संस्थान सदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, चन्द्रभान गुप्ता, मुख्य अधिशाषी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव, गिरीश सर्राफ, अतुल शोरावाला आदि विशेष रुप से उपस्थित थे। 

 

नारद संवाद

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