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भय्यूजी महाराज ने खुदकुशी करने से पहले छोड़ा सुसाइट नोट, बताई ये वजह

भय्यूजी महाराज ने खुदकुशी करने से पहले छोड़ा सुसाइट नोट, बताई ये वजहनई दिल्ली। मध्य प्रदेश के चर्चित धार्मिक गुरु भय्यू महाराज ने मंगलवार (12 जून) को अपने आवास पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस बीच उनका एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। एक पन्ने का यह सुसाइट नोट अंग्रेजी में है जिसमें भय्यूजी ने लिखा है कि वह बहुत तनाव में दुनिया में छोड़ रहे हैं। उन्होंने इस सुसाइड नोट में लोगों से अपने परिवार की देखभाल करने की अपील की है। 

 

सुसाइड नोट के मुताबिक भय्यूजी महाराज ने ने कहा, ‘मैं बहुत तनाव में दुनिया छोड़ रहा हूं। कोई मेरे परिवार की जिम्मेदारी ले। मैं तनाव से तंग आ चुका हूं।’ बता दें कि आध्यात्मिक गुरु ने मंगलवार को कथित रूप से गोली मारकर खुदकुशी कर ली। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि घटना के बाद भय्यूजी को इंदौर के बॉम्बे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। भय्यूजी महाराज को मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही राज्य मंत्री का दर्जा दिया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था। 

 

हाल ही में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने 49 वर्षीय भय्यू महाराज समेत पांच धर्म गुरुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। धार्मिक क्षेत्र में नाम कमाने से पहले भय्यू महाराज मॉडलिंग करते थे। भय्यू महाराज ने हाल ही में पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी शादी की थी। भय्यू महाराज का असली नाम उदय सिंह देशमुख था। इंदौर के बापट चौक पर भय्यू महाराज का विशालकाय आश्रम है।

 

भय्यूजी महाराज को लोग उदय सिंह देशमुख से जानते है...

अध्यात्म की दुनिया में आने से पहले भय्यूजी को लोग उदय सिंह देशमुख के नाम से जानते थे। भय्यूजी का जन्म 1968 में शाजापुर के शुजालपुर में एक जमींदार परिवार में हुआ था। भय्यूजी का अध्यात्म और दर्शन के प्रति लगाव बचपन से ही रहा और वह तलवारबाजी और घुड़सवारी का भी शौक रखते थे।

 

भय्यू जी महाराज ने तुड़वाया था पीएम मोदी का उपवास...

भय्यू जी महाराज को मध्य प्रदेश का एक हाई प्रोफाइल संत माना जाता था और आम ही नहीं खास लोगों में भी उनकी पहचान थी। इस वजह से उनको हाई प्रोफाइल संत भी कहा जाता था। बॉलीवुड में लता मंगेशकर, आशा भोंसले समेत कई हस्तियां उनको फॉलो करती थीं तो राजनीति में भी भय्यू जी महाराज खासा दबदबा रखते थे। वह देश के कई दग्गिज नेताओं के संपर्क में रहते थे। भय्यू जी महाराज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी भी माना जाता था। खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने से पहले जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री होते हुए सद्भावना उपवास पर बैठे थे, तब उसे तुड़वाने के लिए भय्यू जी महाराज को ही बुलाया गया था।

 

धार्मिक एवं परमार्थ ट्रस्ट की स्थापना की...

भय्यूजी ने दुनियादारी छोडक़र इंदौर में सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं परमार्थ ट्रस्ट की स्थापना की और धार्मिक कार्यों में जुट गए। भय्यूजी की यह संस्था महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में सामाजिक कार्य करती है। संस्था ने भूमि सुधार, पेयजल और बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया है। इसके अलावा भय्यूजी की कई बार राजनीतिक सक्रियता भी देखने को मिली। उन्होंने संगठनों और सरकार के बीच मध्यस्थता का भी काम किया है।

 

साभार-khaskhabar.com

 

 

 

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