देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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बेंगलूरु। फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए होने वाले शक्ति परीक्षण में भाजपा ने एस. सुरेश का नाम दिया था हालांकि भाजपा ने उनका नाम वापस ले लिया। इसके बाद पूर्व स्पीकर और स्वास्थ्य मंत्री के.आर. रमेश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर चुने गए। कर्नाटक विधानसभा में शक्ति परीक्षण शुरू हो चुका है और सीएम एचडी कुमारस्वामी ने राज्य की विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। कुमारस्वामी ने कांग्रेस-जेडीएस के समर्थन में 117 विधायकों (कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37, 2 अन्य) के हस्ताक्षर वाला विश्वास प्रस्ताव पेश किया। कुमारस्वामी के शक्ति परीक्षण करने के पश्चात भाजपा विधायकों ने सदन का वॉकआउट कर दिया।
इससे पहले सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जनादेश बीजेपी के लिए नहीं था।
उन्होंने कहा कि इस बार का जनादेश साल 2004 की तरह है। उस वर्ष मैं पहली बार विधायक बना था और सदन की कार्यवाही को देखता था। कुमारस्वामी ने कहा मैं गुलाम नबी आजाद, सिद्धारमैया और परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहूंगा।
वहीं भाजपा द्वारा स्पीकर के लिए वापस लिए गए नाम पर बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि स्पीकर पद की गरिमा को बनाए रखने के लिए उन्होंने ऐसा किया। जद (एस)-कांग्रेस-बसपा गठबंधन के नेता कुमारस्वामी ने गुरुवार को विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं की मौजदूगी में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसी बीच फ्लोर टेस्ट के साथ ही बीजेपी ने स्पीकर पोस्ट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। स्पीकर के चुनाव के कारण कांग्रेस-जेडीएस को दोहरे शक्ति परीक्षण से गुजरना होगा। कांग्रेस के 78 विधायक हैं जबकि कुमारस्वामी की जद (एस) के 36 और बसपा का एक विधायक है। गठबंधन ने केपीजेपी के एकमात्र विधायक और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन का भी दावा किया है।
क्या पांच साल तक रहेगी ये सरकार?
शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 12.15 बजे शुरू होगी। और दोपहर दो बजे मुख्यमंत्री कुमारस्वामी सदन में विश्वास मत प्रस्ताव को पेश करेंगे। परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि गठबंधन को मुख्यमंत्री के रूप में जद (एस) नेता के कार्यकाल पर अभी चर्चा करनी है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या कुमारस्वामी पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा, ‘‘हमने अभी तक इन पर चर्चा नहीं की है।’’
कुमारस्वामी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी के बी एस येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी।
शपथ लेने के बाद कुमारस्वामी ने विश्वास मत हासिल किये जाने के बारे में विश्वास जताया था, लेकिन उन्होंने आशंका भी जताई थीं कि उनकी सरकार को गिराने के लिए बीजेपी ‘‘ऑपरेशन कमल’’ दोहराने का प्रयास कर सकती है।
साभार-khaskhabar.com













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