देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। भारतीय सनातन संस्कृति के दशावतार महोत्सवों में प्रमुख नृसिंह जयन्ती महोत्सव ब्रज मण्डल में लोकोत्सव के रूप में प्रसिद्ध है। ब्रज में स्थित प्राचीन नृसिंह मंदिरों में सेवायतों द्वारा विधिवत वैदिक परम्परा के अनुसार पूजन अर्चन करके मनाया जाता है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर श्री नृसिंह, बाराह, आदि के स्वरूपों में लोक नृत्य के रूप में लीला के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जिसका कि प्रचलन मथुरा-वृन्दावन के प्राचीन स्थलों पर प्राचीन काल से चला आ रहा है। उसी क्रम में आज मथुरापुरी के चैबच्चा मौहल्ला स्थित नृसिंह मंदिर लीला का मंचन गोपाल वैष्णव पीठ के पीठाधीश्वर श्री श्री 108 श्री पुरूषोत्तमलाल महाराज के सान्निध्य में चैबच्चा स्थित गोपाल मंदिर पर तथा सतघड़ा स्थित प्राचीन नृसिंह लीला सेवा संस्थान द्वारा सतघड़ा मथुरा में एवं मानिक चैक में परम्परागत रूप से मनाया गया। नृसिंह जयन्ती महोत्सव के अवसर ठाकुर जी के विग्रहों का वैदिक परम्परा के अनुसार पंचामृत अभिषेक करके पूजन किया गया। तत्पश्चात् रात्रि को वाराह भगवान की लीला का मंचन किया गया जिनके साथ गणेश, हनुमान, आदि देवी देवताओं ने नृत्य द्वारा लीला का प्रदर्शन किया। चैबच्चा मौहल्ला में लीला के सहयोग में लालजी पाठक, बालकृष्ण पाठक, बल्देव पाठक, पुरूषोत्तम पाठक, गोकुलेष जी, रामकिशन पाठक, अजय चतुर्वेदी मन्नू, राजू चतुर्वेदी, प्रतीक, चिराग, पुश्कर, मिक्की, आशुतोष, मनोज, पाला, भूरी, हीरे, सुमित पाठक, विज्जू पाठक, मथुरेष पाठक, लक्ष्मण, आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
नृसिंह सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सतघड़ा गली में लीला उत्सव में प्रहलाद शर्मा, चिन्टू शर्मा, डाॅ. यशपाल शर्मा, कुंजबिहारी चतुर्वेदी, हिमांशु यादव, आदि ने प्रमुख रूप से व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।













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