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संस्कृति को बढ़ाने में विश्वकोष की अहम भूमिका

संस्थान में हुई कार्यशाला में उपस्थित संस्था के पदाधिकारीगण वृंदावन। ब्रज संस्कृति विष्वकोश के ब्रजभाशा एवं लोक साहित्य विशयक तृतीय खण्ड की कार्यशाला शनिवार को वृन्दावन षोध संस्थान के सभागार में आयोजित की गयी। जिसमें ब्रजभाशा की परंपरा में रचे गये परिचई, ज्ञान-विज्ञान, अष्टक, शतक, सतसई एवं बारहमासा आदि ग्रंथों की श्रृंखला के संयोजन के साथ ही ब्रजलोक साहित्य की विविधताओं का विष्वकोष में प्रस्तुतिकरण पर विचार साझा किये गये।

इस दौरान निदेशक सतीशचन्द्र दीक्षित ने उपस्थित विद्वानों का स्वागत करते हुए कहा ब्रज संस्कृति विष्वकोश भावी पीढी के लिए संस्कृति के अध्ययन का आधार है, जिसमें सभी का सहयोग जरूरी है। वृन्दावन षोध समिति के सदस्य लक्ष्मीनारायण तिवारी एवं ब्रजभाषा अकादमी राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष डाॅ॰ कृश्णचन्द्र गोस्वामी ने कहा कि विश्वकोश के अन्तर्गत टिप्पणियों के रूप में संयोजित जानकारियां तथ्यपरक तथा प्रामाणिक होनी चाहिये, जो सूचनात्मक होने के साथ ही प्रामाणिक तथा विस्तार से रहित हों। कानोडिया कालेज जयपुर की डाॅ॰ षीताभ शर्माएवं ब्रज संस्कृति विष्वकोष के सह-संपादक डाॅ॰ राजेष शर्मा ने कहा ब्रजभाशा के अन्तर्गत कृशि, गणित एवं पशुपालन पर केन्द्रित ब्रजभाषा काव्यानुवाद की पोथियों का प्रस्तुतिकरण भी विष्वकोष के अन्तर्गत होना चाहिये। जिसके लिये विष्वकोश अनुभाग को विशय सम्मत विद्वान का सहयोग आवश्यक है। शासी परिषद सदस्य राधाकृष्ण पाठक एवं विश्वकोष प्रभारी डाॅ॰ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने विश्वकोष परियोजना के सन्दर्भ में आयोजित कार्यषाला की विस्तृत जानकारी देते हुए संस्कृति प्रेमी सुधीजनों से इस पवित्र कार्य में सहयोग की अपील की। डाॅ.राजेन्द्रकृष्ण अग्रवाल ने कहा लोक साहित्य के अंतर्गत ब्रज संस्कृति से अभिप्रेत इसके साहित्य के संयोजन को लेकर विचार सुझाये।इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ठा॰श्रीबांकेबिहारी के चित्रपट पर माल्यार्पण से हुआ। इस अवसर पर कुंजवल्लभ गोस्वामी, डाॅ.एस.पी.सिंह, गीतेश कुमार शर्मा, मोहनलाल गौतम, ‘मोही’, गोपालशरण शर्मा, मानद संपादक करूणेष उपाध्याय, सहायक-संपादक प्रगति शर्मा, जुगल शर्मा, कृश्ण कुमार मिश्रा, उमाशंकर पुरोहित, सुकुमार गोस्वामी, रजत शुक्ला, जितेन्द्र कुमार, पारूल शर्मा, अशोक दीक्षित आदि अनेक जन उपस्थित थे।

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