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एमवीडीए की कार्यप्रणाली में सुधार करने में जुटी है विप्रा उपाध्यक्ष

बैठक में हुए बवाल के बाद विप्रा उपाध्यक्ष बातचीत करते हुए  खत्म हो रहा है लोगों में एमवीडीए का डर

मथुरा।  एमवीडीए उपाध्यक्ष यशु रस्तुगी का कहना है कि स्टाफ की की है, इससे भी ज्यादा नीयत की बात है। नीयत एक दम से नहीं बदलती है, एटिट्यूट धीरेधीरे बनता है। उन्होंने कहाकि अब कोई खुलेआम अनियमितता नहीं कर रहा है। अब अनियमिता खुलेआम वही करेगा जिन्हें किसी तरह से विश्वास है कि मामला निचले स्तर से ही निपट जाएगा। जो आदमी अवैध निर्माण कर रहा है और जिस जेई के क्षेत्र में काम हो रहा है अगर उस जेई की नीयत खराब है तो एक्शन कहां लिया जाएगा। हम इसके बाद भी ज्यादा सख्ती करते हैं तो उन लोगों को परेशान किया जाएगा जिनके मामले कम महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पकड़ लिया जाएगा। जहां पूरा होटल बन गया है उन्हें नहीं पकड़ा जाएगा। सख्ती उल्टी भी न पड़ जाये लेकिन यह नहीं है कि इस डर की वजह से काम नहीं किया जाए।

दूसरा पूर्णकालिक सचिव की दिक्कत है।  यह काम ज्यूडिशरी का है, नोटिस भी दे दिया तो सीआॅफ की कार्यवाही साल भर तक नहीं होती है, इससे डर कम हो गया है। छह महीने से एमवीडीए में सचिव नही है, जिनके पास प्रभार है उनकी कभी परीक्षा, कभी इलैक्शन ड्यूटी लगा दी जाती है। अगर में इस में लग गई तो काम नहीं कर पाऊंगी। एक बाबू की पोस्टिंग को रोका हुआ है, दो बाबू को निकाला जा चुका हैं, एक जेई मेडिकल पर है, ऐसे में कैसे सिस्टम ठीक होगा। हमें रिसोर्सिस चाहिए, यहां कुछ बंदिश हैं, प्रवर्तन में कुछ आठ से  नौ हजार फाइल्स हैं, एक क्या दो कर्मचारी भी इन्हें नहीं निपटा पाएंगे। एक विकल्प है कि इन्हें कंप्यूटराइड भी करा सकते हैं। जेई को इस पर लगा देंगे तो बाकी काम कौन करेगा। नोटिस पर कार्यवाही ही नहीं होगा तो कैसे चलेगा। कमिश्नर की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। गोवर्धन, वृंदावन, श्रीकृष्ण जन्मस्थान क्षेत्र में भी अवैध निर्माण हो रहे हैं। बीच वाले एरिया में जो अवैध निर्माण हो रहा है उन्हें कौन देखे, हाईकोर्ट, एनजीटी ने भी कई मामलों में संज्ञान लिया है, नये मामलों पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। जितने संसाधन हमारे पास हैं उनसे पुराने मामलों को ही निपटाने में लगे हैं। यह जरूरी है कि एक आदमी सिर्फ प्रवर्तन देखे, यदि इंजीनियर को प्रवर्तन में लगा देंगे तो गड़बड़ हो जाएगी। हालांकि कमिश्नर की बैठक में यह सब करने को बोला गया है लेकिन हम नहीं लगाएंगे। 

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