देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा। जिले के वृंदावन नगर में सोमवार को रंगभरनी एकादशी पर बांकेबिहारी का आंगन यानी समूचा वृंदावन अबीर और गुलाल से सराबोर हो गया। सुबह से श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते पंचकोसीय परिक्रमा लगाते हुए अपने आराध्य ठाकुरजी बांकेबिहारी से होली खेली।
सोमवार वृंदावन परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ढोल, मृदंग और मजीरा की धुन पर नाचते गाते और गुलाल उड़ाते चल रही थी। होली के रसिया की धुन पर युवा और वृद्ध भी जमकर थिरके। मथुरा मार्ग हो या छटीकरा मार्ग और फिर पानीगांव से होकर शहर में प्रवेश करने वाला रास्ता हर ओर हजारों भक्तों की टोलियां नाचते-गाते और गुलाल उड़ाते शहर में प्रवेश कर रही थीं। दूर-दराज से वाहनों में आए श्रद्धालुओं को शहर के बाहर ही रोक दिया गया। जहां से अधिकतर श्रद्धालु पैदल ही परिक्रमा मार्ग तक पहुंचे और वहीं से परिक्रमा शुरू की, मंदिरों के दर्शन किए और लौट लिए। शहर के बाहर पूरे दिन वाहन पार्किंग से पहले कई किलोमीटर तक श्रद्धालुओं के वाहनों की लंबी कतार लगी रही। बांकेबिहारी समेत राधाबल्लभ, राधादामोदर, राधारमण, राधागोपीनाथ, गोविंद देव, मदनमोहन और राधाश्याम सुंदर समेत अनेक मंदिरों में पूरे दिन होली का उल्लास छाया रहा। भक्तों ने ठाकुरजी के साथ होली खेलने का जमकर आनंद उठाया। वृंदावन की कुंजगलियां सोमवार को गुलाल से पट गई, चारों ओर लाल रंग दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने निधिवन और सेवाकुंज में वृक्षों पर गुलाल लगाकर होली का आनंद लिया।













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